आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को घेरने की हरसंभव कोशिश करते दिख रहे हैं. इसके तहत वे ग़ैर-भाजपा पार्टियों को तो एकजुट कर ही रहे हैं केंद्रीय जांच एजेंसियों की राह भी मुश्किल करते नज़र आते हैं. मिसाल के तौर पर उनकी सरकार ने अभी कुछ समय पहले आंध्र प्रदेश में सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को दी गई ‘जनरल कंसेंट’ वापस ले ली. इसके बाद पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने भी यही किया. इस तरह अब दोनों राज्यों में सीबीआई को किसी भी जांच या छापामारी आदि से पहले वहां की सरकारों की पूर्व अनुमति लेनी होगी, जो पहले ‘जनरल कंसेंट’ मिले हाेने की वज़ह से ज़रूरी नहीं थी. इसी तरह अब सूत्र बताते हैं कि चंद्रबाबू नायडू दो अन्य केंद्रीय एजेंसियों- आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लिए भी परेशानी बन सकते हैं.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के एक सांसद ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि सबसे पहले दिल्ली में सभी भाजपा-विरोधी पार्टियों का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम यानी न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया जाएगा. इसके बाद सभी विपक्षी दलों के प्रतिनिधि केंद्रीय जांच एजेंसियों के प्रमुखों से जाकर मिलेंगे. उनसे आग्रह करेंगे कि उन्हें केंद्र सरकार के राजनीतिक एजेंडे को लागू करने पर ध्यान नहीं देना चाहिए. अपनी प्रतिष्ठा के अनुरूप निष्पक्ष रहना चाहिए.

टीडीपी के इन सांसद की मानें तो इसके बाद भी अगर केंद्रीय एजेंसियों का रवैया नहीं सुधरा और वे केंद्र के राजनीतिक एजेंडे के हिसाब से विपक्षी दलों को परेशान करने की कार्रवाई करती रहीं तो दूसरा तरीका अपनाया जाएगा. इसके तहत सभी विपक्षी दलाें में आम सहमति बनाई जाएगी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की जाएगी. विपक्षी दल शीर्ष अदालत से आग्रह करेंगे कि आयकर विभाग, ईडी, सीबीआई जैसी केंद्र की एजेंसियों के अधिकारों में कटौती की जाए. ताकि वे विपक्षी दलों को बेवज़ह परेशान न कर सकें.

सूत्रों की मानें तो चंद्रबाबू नायडू इस बाबत विपक्ष के कुछ नेताओं से बात कर चुके हैं. कानून के जानकारों से भी मशविरा किया गया है. अब तक इस संबंध में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिली हैं, जिनसे नायडू का उत्साह बढ़ा है. सूत्र बताते हैं, ‘टीडीपी प्रमुख यह ख़ास तौर पर चाहते हैं कि किसी चुनाव से छह-आठ महीने पहले केंद्रीय एजेंसियों को संबंधित राज्य में छापामारी-तलाशी आदि की कार्रवाई से रोका जाए. अलबत्ता इस मामले में कानूनी रास्ता तभी अख़्तियार किया जाएगा जब उसके अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं रहेगा.’