भारतीय रेलवे आवासीय क्षेत्रों के किनारे स्थित रेल पटरियों से लोगों को दूर रखने के लिए 3,000 किलोमीटर दीवार बनाने का फैसला किया है. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अमृतसर में हुई दुर्घटना के बाद रेलमंत्री पीयूष गोयल ने यह फैसला लिया है. अमृतसर में हुए इस हादसे में 62 लोगों की मौत हो गई थी. यह हादसा तब हुआ था जब लोग दशहरा मेले के दौरान रेल की पटरियों पर इकट्ठा हुए थे.

भारतीय रेलवे ने अनुमान लगाया है कि इसमें करीब 2,500 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. आवासीय क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली रेल की पटरियों के किनारे बनने वाली इन दीवारों की ऊंचाई 2.7 मीटर होगी. रेलवे बोर्ड के सदस्य (इंजीनियरिंग) विश्वेष चौबे कहते हैं, ‘इन दीवारों के चलते पटरियों के करीब बसी बस्तियों के लोग और जानवर आसानी से पटरियों पर नहीं आ पाएंगे. इसके साथ ही दीवार की ऊंचाई ज्यादा होने के कारण पटरियों पर कूड़ा फेंकना भी आसान नहीं होगा.’

रेलवे से जुड़े सूत्रों मुताबिक आने वाले समय में बहुत सी ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई जानी है. ऐसे में ट्रैक को घेरते हुए ऐसी दीवार बनाना आवश्यक हो गया है. वहीं रेलवे सुरक्षा आयोग ने निर्धारित किया है कि 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लिए सुरक्षा मंजूरी प्राप्त करने के लिए पटरियों पर फेंस लगाने या दीवार बनाने की जरूरत होगी. वहीं अतिसंवेदनशील इलाकों में बाउंड्री वॉल बनाने की योजना पर काम रहो रहा है जिसमें नेशनल हाईवे नेटवर्क भी शामिल हैं.

अमृतसर की घटना से पहले क्षेत्रीय रेलवे ने समस्या वाले क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किए गए कुछ इलाकों में 2,000 किलोमीटर की दीवारों का निर्माण करने की योजना बनाई थी. 2018-19 के बजट के हिस्से के रूप में इस काम की लागत 650 करोड़ रुपये अनुमानित थी. इसके लिए राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष से पैसा जारी किया जाएगा. पांच सालों में इस फंड के तहत एक करोड़ रुपये को सुरक्षा पर खर्च किया जाना है. रेल अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए टेंडर पहले ही जारी किए जा चुका हैं.