अगले महीने की सात तारीख को होने वाले राजस्थान विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से टिकट न मिलने से नाराज ज्ञानदेव आहूजा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है. इसके साथ ही उन्होंने जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा भी कर दी है. एनडीटीवी के मुताबिक 63 वर्षीय ज्ञानदेव आहूजा ने यह भी कहा है, ‘पार्टी ने मेरी टिकट काटने का कोई कारण भी नहीं बताया है. इसके बाद मैंने अपने परिवार के सदस्यों और समर्थकों की सलाह पर मैंने भाजपा से इस्तीफा देने और सांगानेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया है.’

राजस्थान विधानसभा के पिछले चुनाव में ज्ञानदेव आहूजा ने भाजपा के टिकट पर अलवर की रामगढ़ सीट से जीत हासिल की थी. इस चुनाव में उन्होंने सांगानेर की जिस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने की बात कही है उस पर 2013 में भाजपा के पूर्व नेता घनश्याम तिवाड़ी ने जीत हासिल की थे. हालांकि राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के साथ मतभेद बढ़ने पर भाजपा छोड़कर वे अपने बेटे द्वारा स्थापित भारत वाहिनी पार्टी में शामिल हो गए थे.

इस बीच ज्ञानदेव आहूजा ने यह भी कहा है कि वे गोरक्षा और अयोध्या में राम मंदिर के जल्द निर्माण जैसे हिंदुत्व के मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे. इससे पहले अपने विवादित बयानों को लेकर ज्ञानदेव आहूजा काफी समय से चर्चा में रहे हैं. बीते दिनों उन्होंने कहा था कि पंडित जवाहरलाल नेहरू पंडित नहीं थे. वे गाय और सूअर का मांस खाते थे. इसके अलावा जेएनयू और गौतस्करी के संबंध में भी उनकी तरफ से ऐसे ही विवादित बयान आए थे.

उधर, विवादों से नजदीकी रिश्ता रखने वाले ज्ञानदेव आहूजा अब एक नए विवाद में भी फंसते नजर आ रहे हैं. खबरों के मुताबिक सोमवार को जब वे सांगानेर सीट से अपना नामांकन कराने जा रहे थे तो उस दौरान उन्होंने अपने हाथों में नोटों की गड्डी लहराई थी. इसके अलावा कुछ लोगों को उन्होंने नोट भी बांटे थे. इस घटना को लेकर आहूजा के विरोधियों ने उन पर खुलेआम चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है.