देश के सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ उसके विरोधी दलों का ‘महागठबंधन’ तैयार करने की कवायद में जुटे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सोमवार को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में हुई इस मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में चंद्रबाबू नायडू ने दोहराया कि देश में लोकतंत्र की रक्षा के लिए भाजपा विरोधी दलों का एकजुट होना जरूरी है.

इसके सा​थ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ असहिष्णुता काफी बढ़ गई है और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), इनकम टैक्स, रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया (आरबीआई) और महालेखा परीक्षक (सीएजी) जैसे विभागों के अधिकारियों को भारी दबाव का सामना करना पड़ रहा है.’

इस मौके पर जब ममता बनर्जी से पूछा गया कि अगले साल होने वाले आम चुनाव में इस महागठबंधन को प्रमुख चेहरा कौन होगा तो उन्होंने कहा, ‘हर पार्टी इसका चेहरा होगी. भाजपा को हराने के लिए हर पार्टी को एक मंच पर एक साथ आने की जरूरत है.’ इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में आकर उनसे मुलाकात करने के लिए उन्होंने नायडू का आभार भी जताया.

इस महागठबंधन को बुनने के प्रयास में चंद्रबाबू नायडू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के नेता फारुख अब्दुल्ला, आम आदमी पार्टी (आाप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के प्रमुख एमके स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के साथ भी मुलाकात कर चुके हैं.

इन नेताओं से हुई मुलाकातों पर चंद्रबाबू नायडू का कहना था, ‘महागठबंधन के लिए इन सभी नेताओं ने मुझे सहयोग का भरोसा दिलाया है. इस कवायद में कांग्रेस की जिम्मेदारी ज्यादा है और यह बात हर दल को स्वीकार भी करनी चाहिए. ऐसे में कांग्रेस इस गठबंधन का प्रमुख विपक्षी दल होगा.’ उधर, भाजपा के खिलाफ एकजुट हो रहे इन दलों की इसी महीने की 22 तारीख को एक बैठक होनी थी लेकिन फिलहाल इसे टाल दिया गया है. इस बारे में चंद्रबाबू नायडू का कहना है कि इसकी अगली तारीख की घोषणा जल्दी ही की जाएगी.

दिलचस्प बात यह है कि चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) केंद्र के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के सहयोगियों में से एक थी. लेकिन केंद्र की तरफ से आंध प्रदेश को ‘विशेष राज्य का दर्जा’ न दिए जाने पर इसी साल मार्च में उनकी पार्टी एनडीए के घटकों से अलग हो गई थी.