अमेरिका की एक संघीय अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने उनके उस नए आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले लोगों को शरण न देने की बात कही गई है.

अमेरिकी न्यूज़ वेबसाइट एनपीआर के मुताबिक मंगलवार को सैन फ्रांसिस्को के संघीय कोर्ट ने राष्ट्रपति के फैसले पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा कि सरकार का यह फैसला सही नहीं है. कोर्ट के मुताबिक यह फैसला अमेरिकी संविधान का उल्लंघन करता है और इससे शरणार्थियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

पिछले एक महीने से लैटिन अमेरिका के तीन देशों अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला और होंडूरास के रहने वाले हजारों लोगों का काफिला अमेरिका की ओर बढ़ रहा है. ये लोग अपने देश में फैली गरीबी और हिंसा के कारण बतौर शरणार्थी अमेरिका में पनाह लेना चाहते हैं.

यह खबर आने के बाद इस महीने की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप ने इन लोगों को किसी भी हालत में अमेरिका में शरण देने की घोषणा की थी. ट्रंप ने अमेरिका की दक्षिणी सीमा पर 6000 जवानों की तैनाती का आदेश देते हुए यह भी कहा था कि अगर शरणार्थी जबरदस्ती घुसने के प्रयास में सैनिकों पर पथराव करते हैं तो उन पर गोलियां भी चलाई जा सकती हैं.

डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश के बाद इसके खिलाफ अमेरिका की कई मानवाधिकार संस्थाओं ने सैन फ्रांसिस्को कोर्ट में याचिकायें दायर की थीं. इन याचिकाओं में राष्ट्रपति के फैसले पर रोक लगाने की अपील करते हुए कहा गया था कि राष्ट्रपति का फैसला शरणार्थियों से जुड़े ‘इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट’ (आईएनए) का उल्लंघन करता है. आईएनए एक्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिका में वैध या अवैध रूप से आने वाला हर व्यक्ति वहां शरण के लिए आवेदन करने के योग्य है और उसे राष्ट्रपति प्रशासन ऐसा करने से नहीं रोक सकता.