उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थि​त भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के चार वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ अपने ही एक दलित सहकर्मी को कथित तौर पर प्रताड़ित करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई है. खबरों के मुताबिक संस्थान के एयरोस्पेस विभाग में कार्यरत सुब्रमण्यम सडरेला नाम के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने इस साल जनवरी में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के समक्ष शिकायत दी थी. इसमें उन्होंने संस्थान के अपने कुछ वरिष्ठ सहकर्मियों पर उन्हें आरक्षण के तहत नौकरी पाने के हवाले से और जातिसूचक टिप्पणियों के जरिये प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था.

प्राप्त शिकायत के आधार पर एनसीएससी ने संस्थान से उसके चार वरिष्ठ प्रोफेसरों ईशान शर्मा, संजय मित्तल, राजीव शेखर और चंद्रशेखर उपाध्याय के खिलाफ मामला दर्ज कराने को कहा था. इसे लेकर अगस्त के महीने में एक सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में आईआईटी ने आरोपितों के खिलाफ एक जांच समिति भी गठित की थी जिसमें इन्हें दोषी पाया गया था.

वहीं जांच के बाद भी आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर सडरेला ने एक बार फिर एनसीएससी में शिकायत की थी. इसके बाद इसी सोमवार को चारों आरोपितों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न निवारण कानून की विभिन्न धाराओं के तहत कानपुर के कल्याणपुर पुलिस थाने में मामला दर्ज करा दिया गया है. इस बीच कल्याणपुर के सर्किल आॅफिसर राजेश पांडेय ने कहा है, ‘पुलिस की तरफ से इस मामले में जांच पूरी किए जाने के बाद ही आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा.’

उधर, आईआईटी के दूसरे शिक्षक और छात्र वरिष्ठ प्रोफेसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराए जाने का विरोध कर रहे हैं. संस्थान के शिक्षकों का कहना है कि मामले में आरोपित बनाए गए प्रोफेसरों के खिलाफ मामला वापस नहीं लिया जाता तो वे सामूहिक इस्तीफा दे देंगे. इस बीच छात्रों ने कहा है कि एफआईआर वापस न लिए जाने पर उनकी तरफ से आंदोलन किया जाएगा.