ट्विटर के सीईओ और सह-संस्थापक जैक डोरसी बीते हफ्ते अपनी भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सहित कई लोगों से मुलाकात के चलते चर्चा में रहे थे. वहीं कल से वे अपनी उस यात्रा से जुड़ी एक तस्वीर के कारण ट्विटर पर लोगों के निशाने पर हैं.

अपनी भारत यात्रा के दौरान डोरसी ने कुछ महिला पत्रकारों के साथ भी एक मुलाकात की थी. यह ग्रुप फोटो इसी मुलाकात के बाद की है. इसमें असल विवाद की वजह वह प्लेकार्ड है जो डोरसी पकड़े हुए हैं. इस प्लेकार्ड पर लिखा हुआ था - Smash Brahminical Patriarchy (ब्रह्मणवादी पितृसत्ता को कुचल दिया जाए). एक बड़े तबके ने इस तस्वीर को शेयर करते हुए इस पर आपत्ति जताई है और इसे ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ बताया है.

इन्फोसिस के पूर्व वित्त अधिकारी और चर्चित टीवी पैनलिस्ट मोहनदास पाई ने केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर से ‘एक भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत फैलाने’ के इस मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए ट्वीट किया है, ‘एक भारतीय के नाते ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी द्वारा पकड़े गए उस प्लेकार्ड से मुझे झटका लगा है...’ ऐसी प्रतिक्रियाओं पर एक तंजभरा ट्वीट है, ‘अब मैं उम्मीद कर रहा हूं कि जैक डोरसे मंदिरों में जाएंगे और शिवभक्त बनकर ट्विटर के ब्राह्मण यूज़रों को मनाने का काम करेंगे.’

वहीं दूसरी तरफ जैक डोरसे के समर्थन में भी कई प्रतिक्रियाएं आई हैं. पत्रकार वसुधा वेणुगोपाल का ट्वीट है, ‘लोग ट्विटर कैंपेन smash brahminical patriarchy के खिलाफ रोष क्यों जता रहे हैं? यह सिर्फ उस संस्कृति का विरोध करता है जहां पवित्रता, अशुद्धि और जन्मजात श्रेष्ठता को तवज्जो दी जाती है. ऐसी बात के विरोध में भला क्या गलत है?’

जैक डोरसे की इस तस्वीर के हवाले से ट्विटर पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

अश्विन एस कुमार | @ashwinskumar

जैक डोरसे का तमिलनाडु की राजनीति और फिल्मों में उज्ज्वल भविष्य है! (क्योंकि यहां ब्राह्मणवाद के विरोध की धारा बहुत मजबूत है)

आदित्य मगल | @jhunjhunwala

‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ वाले प्लेकार्ड से जो लोग नाराज़ हैं, उन्हें मनाने के लिए ट्विटर के सीईओ अब ब्राह्मण बनने के लिए अपना उपनयन संस्कार करवा रहे हैं :

अद्वैता काला‏ | @AdvaitaKala

यह वो देश है जहां एक पिछड़े वर्ग के व्यक्ति को जनता ने ऐतिहासिक समर्थन से शीर्ष पद पर पहुंचाया है. मुझे यकीन है कि जब ओबामा राष्ट्रपति चुने गए थे तब जैक ने इसकी खुशी मनाई होगी. एक ‘हेट स्पीच’ वाले मैसेज के साथ तस्वीर खिंचवाना दिखाता है कि आपके ये शब्द कितने खोखले हैं कि ट्विटर को स्वस्थ संवाद का एक मंच होना चाहिए.

रंजोना बनर्जी | @ranjona

हर दूसरे दिन होने वाली दलितों के खिलाफ हिंसा और उनके दमन को लेकर हमें ट्विटर पर वैसा आक्रोश देखने को नहीं मिलता जैसा जैक डोरसे के प्लेकार्ड पकड़ने पर दिख रहा है. यही चीज बताती है कि क्यों हमें ब्राह्मणवादी पितृसत्ता खत्म करने की जरूरत है.