केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के शीर्ष अधिकारियों के बीच चल रहे घमासान का मुद्दा अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. कुछ समय पहले सीबीआई डॉयरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डॉयरेक्टर राकेश अस्थाना ने एक-दूसरे के खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग में भ्रष्टाचार की शिकायतें की थीं. बात बिगड़ने और विवाद बाहर आने पर इस मामले से जुड़े सभी अधिकारियों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया. इन अधिकारियों ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जिसकी सुनवाई जारी है. जानकारों के मुताबिक अब यह मामला लंबा खिंच सकता है और कुछ और नए खुलासे भी हो सकते हैं. आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के अलावा इस विवाद में सीबीआई के कुछ और अधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं, इनमें से कोई विवाद की वजह दिखता है तो कोई व्हिसल ब्लोअर नजर आता है.

एके शर्मा

सीबीआई के संयुक्त निदेशक (नीति) एके शर्मा, एजेंसी प्रमुख आलोक वर्मा के करीबी माने जाते हैं. इस मसले से जुड़े बाकी चार अधिकारी जिस एंटी करप्शन ब्रांच से आते हैं उसका नेतृत्व भी शर्मा के ही हाथों में था. एके शर्मा जिस पद पर हैं, वह इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि उनके दो पूर्ववर्ती एजेंसी प्रमुख बन चुके हैं. आलोक वर्मा ने राकेश अस्थाना की टीम से कई मामले वापस लेकर एके शर्मा को ही सौंपे थे. वही राकेश अस्थाना जो सीबीआई में नंबर दो हैं. इन सबके साथ ही अस्थाना के खिलाफ की गई जांच की कार्रवाई में भी एके शर्मा की बड़ी भूमिका रही है. विवाद सामने आने पर उनका तबादला सीबीआई की मरणासन्न मानी जाने वाली इकाई मस्टी डिसिप्लिनरी मॉनिटरिंग एजेंसी (एमडीएमए) में कर दिया गया है.

मनीष कुमार सिन्हा

पांचों अधिकारियों में सबसे वरिष्ठ मनीष कुमार सिन्हा डीआईजी रैंक के अफसर हैं और इस फेहरिस्त में जुड़ा सबसे ताज़ा नाम भी. हाल ही में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपने तबादले पर आपत्ति जताई थी. इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और केंद्रीय कोयला राज्य मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं. अपनी याचिका में सिन्हा ने बताया है कि डोभाल ने राकेश अस्थाना के खिलाफ चल रही जांच में दखलंदाजी करते हुए, उनके घर पर छापे नहीं पड़ने दिए थे. इसके अलावा उन्होंने कोयला राज्य मंत्री चौधरी द्वारा रिश्वत लिए जाने की बात भी कही है.

2000 बैच के आईपीएस अधिकारी एमके सिन्हा, 2013 से सीबीआई का हिस्सा हैं. अपने होम कैडर आंध्र प्रदेश में एंटी-नक्सल ऑपरेशन्स के लिए पुलिस मेडल से भी सम्मानित किए जा चुके हैं. वे बतौर मुख्य जांच अधिकारी राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच कर रहे थे.

अजय कुमार बस्सी

करियर के शुरूआती दौर में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के लिए काम कर चुके अजय कुमार बस्सी ने 1999 में बतौर इंस्पेक्टर सीबीआई जॉइन की थी. तेलगी स्टाम्प घोटाले की जांच करने करने वाले बस्सी अब एजेंसी में डिप्टी एसपी के पद पर हैं. वे उन 14 अधिकारियों में आते हैं जिन्हें 23 अगस्त को सरकार ने अचानक ट्रांसफर के आदेश थमा दिए थे. उनका तबादला पोर्ट ब्लेयर किया गया था और इस मामले को अदालत में ले जाने वाले बस्सी पहले अधिकारी हैं. इसके अलावा राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच करने वाले भी वे पहले अधिकारी हैं. उन्होंने 2016 में हुई अस्थाना की बेटी की शादी की जांच की थी. यह शादी वडोदरा में हुई थी. केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजी गई अपनी चिट्ठियों में राकेश अस्थाना ने बस्सी की ईमानदारी पर संदेह जताया है. उधर, सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में अजय कुमार बस्सी ने एक ऐसी रिकॉर्डिंग का दावा किया है जिसमें एक आरोपित अस्थाना को अपना आदमी बता रहा है.

उधर, मनीष कुमार सिन्हा ने अपनी याचिका में बताया है कि अजय बस्सी ही वे जांच अधिकारी हैं जिन्होंने अस्थाना के घर की तलाशी और उनके फोन को जब्त करने की इज़ाजत मांगी थी. इसी कार्रवाई को रुकवाने का आरोप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल पर लगाया गया है.

अश्विनी गुप्ता

2014 में सीबीआई में आने वाले अश्विनी गुप्ता भी पहले आईबी में काम कर चुके हैं. सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच से पहले वे आर्थिक अपराध विंग और बैंक सिक्योरिटी एंड फ्रॉड सेल में काम कर चुके हैं. गुप्ता, संयुक्त निदेशक एके शर्मा के स्टाफ ऑफिसर और आलोक वर्मा खेमे के बताए जाते हैं. ऐसा माना जाता है कि शर्मा कहने पर ही उन्होंने बस्सी के साथ राकेश अस्थाना की बेटी की शादी से जुड़ी छानबीन की थी. आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के बाद अश्विनी गुप्ता को आईबी में वापस भेजने का आदेश दिया गया जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती किया है. दूसरी तरफ राकेश अस्थाना ने अगस्त में कैबिनेट सेक्रेटरी को भेजे गए एक नोट में अश्विनी गुप्ता पर पत्नी की मदद से भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था.

एसएस गुर्म

सीबीआई से पहले इंटरपोल के लिए काम कर चुके एसएस गुर्म भी एके शर्मा (या कहें आलोक वर्मा) के खेमे के अधिकारी बताए जाते हैं. वे राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच कर रही टीम का हिस्सा थे. बीती 24 अक्टूबर को एडिशनल एसपी (क्राइम ब्रांच) गुर्म का तबादला जबलपुर कर दिया गया है. इसके पहले 16 अक्टूबर को गुर्म ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें उन्होंने कोर्ट से राकेश अस्थाना द्वारा अपने खिलाफ की गई एफएईआर को रद्द करने की अर्जी खारिज करने की मांग की थी. उनका कहना था कि अस्थाना कुछ ‘चुनिंदा’ तथ्यों के सहारे कोर्ट को गुमराह कर खुद को निर्दोष साबित करना चाह रहे हैं.