जम्मू और कश्मीर में राजनीतिक सरगर्मियां एक बार फिर बढ़ने लगी हैं. खबरों के मुताबिक राज्य में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), कांग्रेस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) मिलकर सरकार बना सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन के लिए कांग्रेस हाईकमान से सहमति मिल गई है और तीनों पार्टियों के नेता गुरुवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिलकर सरकार बनाने का प्रस्ताव रख सकते हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में मुख्य गठबंधन कांग्रेस और एनसी के बीच होगा. इन्हें सरकार बनाने के लिए पीडीपी अपना समर्थन देगी. राज्य में तीनों पार्टियों के बीच गठबंधन पर कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है, ‘हम पार्टियों का ये कहना था कि क्यों ना हम इकट्ठे हो जाएं और सरकार बनाएं. अभी वो स्टेज सरकार बनने वाली नहीं है, एक सुझाव के तौर पर बातचीत चल रही है.’

हालांकि, एनसी-पीडीपी के संभावित गठबंधन पर पीडीपी के सांसद मुजफ्फर बेग ने मिला-जुला रुख दिखाते हुए कहा है, ‘जम्मू कैसे रिएक्ट करेगा? ये पूरी तरह से मुस्लिम गठबंधन है, लद्दाख कैसे रिएक्ट करेगा? ऐसी गैर-जिम्मेदाराना बातचीत से जम्मू-कश्मीर में मुश्किलें बढ़ेंगी. लद्दाख, जम्मू उस राज्य का हिस्सा नहीं रहेगा जिस पर किसी एक समुदाय का शासन हो.’

वहीं जम्मू और कश्मीर में सरकार बनाने की कवायद पर मोहर लगाते हुए पीडीपी नेता अलताफ बुखारी ने कहा है, ‘मेरे नेतृत्व ने इस बात की पुष्टि की है कि राजनीतिक और कानूनी रूप से राज्य की विशेष पहचान की रक्षा के लिए तीन पार्टियां गठबंधन के लिए राजी हो गई हैं. बहुत जल्द आपको एक अच्छी खबर मिलेगी.’

जम्मू और कश्मीर में राज्यपाल शासन को छह महीने पूरे होने को हैं. इस साल जून के महीने में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीडीपी से गठबंधन तोड़कर सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद से ही राज्य में राज्यपाल शासन लागू है. जम्मू और कश्मीर में सरकार का कार्यकाल छह साल का होता है और वहां पर राष्ट्रपति के बदले राज्यपाल शासन लागू होता है.