केंद्र सरकार ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर बनाने की मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि इसके निर्माण का खर्च वह खुद ही उठाएगी. द टाइम्स आॅफ इंडिया के मुताबिक यह फैसला गुरुवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की एक बैठक में किया गया. करतारपुर कॉरिडोर पंजाब के गुरुदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक से भारत-पाक की अंतरराष्ट्रीय सीमा तक बनाया जाएगा. इसके साथ ही भारत सरकार पाकिस्तान से उसकी सीमा में ऐसा ही कॉरिडोर बनाने की अपील करेगी. भारत-पाक सीमा के नजदीक ही पाकिस्तान में स्थित करतापुर साहिब को सिखों के पवित्र धर्मस्थलों में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि सिख समुदाय के संस्थापक गुरु नानक देव जी ने वहां अपने जीवन के 18 साल बिताए थे.

उधर, कॉरिडोर निर्माण के इस फैसले को मील का पत्थर बताते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट में लिखा है कि गुरु नानक देव जी के 550वें जन्मदिवस के मौके पर कई अन्य कार्यक्रमों को आयोजन भी किया जाएगा. खबरों के मुताबिक उनकी याद में भारत सरकार एक डाक टिकट के अलावा एक सिक्का जारी करेगी जबकि रेल मंत्रालय की तरफ से नानक देव जी से संबंधित स्थानों से गुजरने वाली एक विशेष ट्रेन चलाई जाएगी. इसके अलावा देश के सभी राज्यों और दूतावासों में भी उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

इस बीच करतारपुर कॉरिडोर को लेकर पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि यह एक अत्याधुनिक कॉरिडोर होगा जिसमें वीजा और कस्टम संबंधी सुविधाएं भी मिलेंगी. उन्होंने आगे कहा कि कैबिनेट बैठक में गुरु नानक देव जी के जन्म से संबंधित सुल्तानपुर लोधी को एक स्मार्ट सिटी के तौर पर वि​कसित किए जाने संबंधी प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है. साथ ही ‘पिंड बाबा नानक धाम’ नाम से यहां एक हैरिटेज कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा जिसमें आम लोग उनके जीवन से जुड़ी विभिन्न जानकारियों से परिचित हो सकेंगे.

इससे पहले इसी साल करतारपुर साहिब कॉरिडोर का मुद्दा उस वक्त चर्चा में आया था जब कांग्रेस के नेता नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पड़ोसी देश गए थे. शपथ ग्रहण के उस कार्यक्रम में नवजोत सिंह सिद्धू वहां के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के गले लगे थे. गले लगने की उस घटना पर भारत में काफी विवाद भी हुआ था. हालांकि तब सिद्धू ने सफाई देते हुए कहा था कि बाजवा ने उनसे गुरु नानक देवजी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर करतारपुर साहिब में कॉरिडोर खोलने की बात कही थी इसीलिए उनका आभार जताते हुए वे उनके गले लगे थे.