हर साल सिख समुदाय के लोग पाकिस्तान के ननकाना साहिब गुरुदारे में गुरु नानक जयंती मनाने के लिए पहुंचते हैं. ननकाना साहिब सिखों के पहले गुरू, गुरुनानक की जन्मस्थली है इसलिए भारत में भी इसे विशेष महत्व दिया जाता है. इस साल गुरूपूरब का यह आयोजन इसलिए भी खास रहा कि पाकिस्तान ने करीब 3,800 भारतीय सिख श्रद्धालुओं को यहां आने के लिए वीजा जारी किया था. वीडियो में दिख रहा नजारा पाकिस्तान के उस होटल के बाहर का है, जहां इन श्रद्धालुओं को ठहराया गया था. भारत से गए मेहमानों की खातिरदारी की शुरूआत पूरे गाजे-बाजे के साथ की गई थी और यह वीडियो इसकी एक झलक दिखाता है. इस तरह के कई वीडियो सोशल मीडिया पर खूब देखे और शेयर किए जा रहे हैं. इसके साथ ही भारत पाकिस्तान के बीच के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने की उम्मीद भी की जा रही है.

लेकिन ननकाना साहिब से ही रंग में भंग डालने वाली कुछ तस्वीरें भी देखने को मिली हैं. उदाहरण के लिए इस दूसरे वीडियो में ‘पंजाब जनमत संग्रह-2020’ का एक पोस्टर नजर आता है जिसमें खालसा चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर भी है. दरअसल ‘पंजाब जनमत संग्रह-2020’ कनाडा और यूरोप में फैले खालिस्तानी समूहों द्वारा शुरू की गई इस मुहिम है जिसका मकसद भारत से अलग, एक स्वतंत्र देश पंजाब की स्थापना करना है. इस मुहिम के तहत दुनिया भर में रह रहे पंजाबियों को यह मांग उठाने के लिए राज़ी करने की कोशिश की जा रही है. ननकाना साहिब में इस तरह के पोस्टर नज़र आना चौंकाता है, वह भी तब जब दोनों तरफ से अमन की कोशिशें हो रही हैं. पाकिस्तान सरकार द्वारा भारतीय श्रद्धालुओं को वीजा देकर और भारत सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर बनाने की घोषणा कर दोनों तरफ से अच्छी खबरें आने का सिलसिला शुरू भी कर दिया था.

एक और चौंकाने वाली बात तब हो जाती है कि जब खलिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाली सैकड़ों लोगों की भीड़ भी यहां से गुजरती दिखाई दे जाती है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भारतीय एजेंसियां लगातार यह कहती रही हैं कि पाकिस्तान में खालिस्तान समर्थक अलगाववादियों को पूरा समर्थन दिया जा रहा है. एजेंसियों के मुताबिक ननकाना साहिब में 30 नवंबर तक चलने वाले गुरपर्ब में आईएसआई (पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) खालिस्तानी अलगाववादियों को समर्थन देकर जनमत संग्रह 2020 के लिए सिखों को उकसाने की साजिश कर रही है.

शायद यही सब वजहें रही हों कि 21 और 22 नवंबर को पाकिस्तान में मौजूद भारतीय उच्चायुक्त के अधिकारियों को भी अपने देश से आए श्रद्धालुओं से मिलने से रोक दिया गया. हालांकि इसके पीछे पाकिस्तान कुछ और कारण बताता है लेकिन सोशल मीडिया पर ननकाना साहब से आए ये वीडियोज और तस्वीरें कोई और ही कहानी बयान करते हैं.