भाजपा की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय ने आपको आवश्यक बुराई क्यों कहा?

देखिए, ऐसा है कि हीरे की परख तो जौहरी को ही होती है!

क्या मतलब? वे तो आपकी बुराई कर रहे हैं, तारीफ नहीं.

नेताओं के लिए क्या बुराई और कैसी तारीफ, सबके-सब एक ही हमाम में हैं. उनके इस विश्लेषण के लिए मैं यही कहूंगा कि जैसे बड़े नेता को नए नेताओं की परख होती है, बड़े अभिनेता को दूसरे अभिनेताओं की परख होती है; वैसे ही बड़ी बुराई ने छोटी बुराई को पहचान लिया है!

उनका यह भी कहना है कि भाजपा आपको ढो रही है. इस बारे में आपका क्या कहेंगे?

ढोना कोई बुरी चीज नहीं है. हमारे देश में बड़ी शान वालों और दुल्हनों की पालकियां खूब ढोई गई हैं... अब दुल्हन तो हम हैं नहीं, पर यदि फिर भी वे हमें ढो रहे हैं तो हमारी शान जरूर होगी. और वैसे भी इस देश की जनता तो पता नहीं क्या-क्या और कैसे-कैसों को ढोने को मजबूर है. मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि वे अच्छे कहार बनने की बुरी ही सही पर कोशिश तो कर रहे हैं! (हंसते हुए)

आपने स्वेच्छा से 2017 में उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार को समर्थन दिया था. फिर आप आजकल लगातार सरकार विरोधी बयान क्यों दे रहे हैं?

केन्द्र सरकार तो नोटबंदी जैसी चीजें लागू करके ‘अर्थव्यवस्था विरोधी’ काम कर रही है. मैं क्या सरकार विरोधी बयान भी नहीं दे सकता!

आप नोटबंदी को अर्थव्यवस्था विरोधी क्यों समझते हैं?

देखिए, मैं तो फिर भी ‘आवश्यक बुराई’ हूं पर नोटबंदी तो देश के लिए ‘अनावश्यक बुराई’ थी! जब मैं ‘आवश्यक बुराई’ होकर भी भाजपा विरोधी समझा जा रहा हूं, तो ऐसे में नोटबंदी ‘अनावश्यक बुराई’ होकर क्या अर्थव्यवस्था विरोधी नहीं कही जाएगी? (खीजते हुए)

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आपके बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है,विनाशकाले विपरीत बुद्धि...

वे योगी हैं. योगी लोग कोई भी बात कहते हैं तो उसके पीछे बड़े गूढ़ अर्थ होते हैं. यदि वे कह रहे हैं कि मेरी बुद्धि विपरीत हो चुकी है तो इसी बात में छिपा हुआ यह अर्थ भी हमें समझ जाना चाहिए कि वे आगामी चुनाव में राज्य में भाजपा के विनाशकाल की तरफ इशारा कर रहे हैं! क्योंकि मेरे अर्थात सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नाश का अर्थ, उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में भाजपा का विनाश है.

आखिर योगी सरकार से आपकी इतनी नाराजगी का कारण क्या है?

मैं राज्य की शिक्षा-प्रणाली में सुधार की बात कर रहा हूं और वे मेरे दिमाग को सुधारने की बात कर रहे हैं...क्या ये नाराजगी की बात नहीं? (खीजते हुए)

अच्छा यह बताइए, जगहों के नाम बदलने पर आपने भाजपा को उसके राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी के नाम बदलने को क्यों कहा?

यदि विकास के लिए शहर का नाम बदला जाना जरूरी है तो व्यक्तिगत विकास के लिए भाजपा के मंत्रियों का नाम बदले जाने की भी तो जरूरत है न!

ओम प्रकाश जी, शहरों के नाम तो शासकों ने पहले भी बदले हैं. लेकिन व्यक्तियों के नाम कोई और थोड़े ही बदलता है.

भाजपा की केंद्र और राज्य दोनों सरकारों ने इस देश में ऐसे कई काम किए हैं जो पहले किसी सरकार ने नहीं किए. इसी तरह व्यक्तियों के नाम यदि अब से पहले किसी दूसरे ने नहीं बदले, तो क्या जरूरी है कि वे अब भी न बदले जाएं! शहरों के नाम पहले भी बदले जा चुके हैं, ये बात आप खुद ही कह रही हैं. बात तो तब हो जब ये सरकार अपने नेताओं के नाम बदलकर दिखाए!

अच्छा यह बताइए, अयोध्या में राममंदिर निर्माण के बारे में आपकी क्या राय है?

राय क्या होनी है! अयोध्या में राममंदिर भाजपा का सिर्फ वोटबैंक बनाने का मुद्दा है, न कि मंदिर-निर्माण का. इससे ज्यादा मुझे इस बारे में कुछ नहीं कहना क्योंकि अभी मेरा सारा ध्यान अपना वोटबैंक बढ़ाने पर है.

अपना वोटबैंक मजबूत करने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

मैं अति पिछड़ों और सर्वाधिक पिछड़ों का राग अलाप रहा हूं और क्या!...अब्ब्ब...मेरा मतलब है कि मैं उनके अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा हूं.

आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के हारने की बात आपने किस आधार पर कही है?

अपने बयानों को आधार से लिंक करने की बात तो सुप्रीम कोर्ट ने नहीं कही है. फिर आप क्यों आधार का जिक्र कर रही हैं? वैसे भाजपा सरकार आधार लाई है तो इसका ये अर्थ नहीं है कि उनके लिए कही गई हर बात का भी कोई न कोई आधार हो ही!

इस साल के शुरू में आपने कहा था कि यदि सरकार ने छह महीने के भीतर ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के भीतर भी आरक्षण करके भर्तियां शुरू नहीं की, तो आप सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे. फिर मांग पूरी न होने पर भी आपने अभी तक समर्थन वापस क्यों नहीं लिया?

(कुढ़ते हुए) आप क्या चाहती हैं, जो नहीं मिला उसके लिए मिला हुआ भी छोड़ दूं!

अच्छा, आप जब-तब इतने विवादित बयान क्यों देते हैं?

भाजपा सरकार इतने विवादित काम कर रही हैं, मैं क्या विवादित बयान भी नहीं दे सकता!...और वैसे भी विवादित बयानों का सारा ठेका भाजपाइयों को मिला हुआ है क्या?

लेकिन ऐसे बयानों से तो आपकी ही छवि खराब होती है न.

देखिए, छवि उसकी खराब होती है जिसकी अच्छी छवि हो! मैंने भविष्य में छवि खराब होने के डर से उसे अच्छा बनाने का टंटा ही नहीं पाला...और वैसे भी देश तो अभी तक एक ही व्यक्ति की अच्छी छवि का हर्जाना भर रहा है.

आपका इशारा किसकी तरफ है?

मैडम, मैं विवादित बयान जरूर देता हूं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि आप मुझे उकसाकर इशारेबाजी भी करवा लेंगी!

2017 से पहले आपकी पार्टी के उम्मीद्वारों ने उत्तर प्रदेश चुनावों में सिर्फखेल बिगाड़ने वालोंके तौर पर ही भूमिका निभाई है. आगामी लोकसभा चुनाव में आपकी क्या भूमिका होने वाली है?

वही वोटकटवा की और क्या!...अरे मेरे कहने का मतलब है कि आगामी लोकसभा चुनावों में हमारी वही भूमिका होगी जो ब्याह-शादियों में फूफाओं की होती है. (मुस्कुराते हुए)