उत्तर प्रदेश के अयोध्या में ‘राम मंदिर निर्माण’ से जुड़ी खबरों को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. अयोध्या में 25 नवंबर को विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ‘धर्म संसद’ के आयोजन की तैयारी में है. गुरुवार को विहिप ने निषेधाज्ञा लागू होने के बाद भी शहर में जुलूस निकाला था. इसके बाद स्थानीय खासकर अल्पसंख्यक तबके के लोग परेशान बताए जा रहे हैं.

वहीं, शिवसेना ने शुक्रवार को भाजपा से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर अध्यादेश लाने और तारीख की घोषणा करने की मांग की है. पार्टी ने कहा कि वह चुनाव के दौरान न तो भगवान राम के नाम पर वोटों की भीख मांगती है और न ही जुमलेबाजी करती है. बताया जाता है कि पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे 24-25 नवंबर को अयोध्या यात्रा पर पहुंच रहे हैं.

मुफ्त चावल मिलने से लोग आलसी हो गए हैं : मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ी टिप्पणी की है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा है कि मुफ्त चावल केवल गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों (बीपीएल) को ही दिया जाए. अदालत का कहना है, ‘एक के बाद एक सरकारों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए सभी को मुफ्त में चावल और अन्य चीजें देना जारी रखा है. इससे लोगों ने सरकारों से सबकुछ पाने की उम्मीद करनी शुरू कर दी. इसके बाद वे आलसी हो गए हैं. छोटे-छोटे कामों के लिए भी प्रवासी मजदूरों की मदद ली जाने लगी है.’ इससे पहले राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि सभी राशनकार्ड धारकों को मुफ्त में चावल दिया जाता है.

‘स्वस्थ पत्नी की मौत के अंदेशे में पहले से ही नई गर्लफ्रेंड तलाशने की कोई तुक नहीं है’

मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के जोरमथांगा ने राज्य विधानसभा के चुनाव के बाद बिना किसी पार्टी के सहयोग के अकेले ही सरकार बनाने का दावा किया है. एमएनएफ मिजोरम की मुख्य विपक्षी पार्टी है और जोरमथांगा मुख्यमंत्री पद के दावेदार. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक भाजपा के साथ तालमेल के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘जब पत्नी स्वस्थ और जीवित हो तो उसकी मौत के अंदेशे में पहले से ही नई गर्लफ्रेंड तलाशने की कोई तुक नहीं है.’ जोरमथांगा का आगे कहना था कि भाजपा को अगर तीन सीटें भी मिल जाएं तो उसका सौभाग्य होगा. मिजोरम में मध्य प्रदेश के साथ 28 नवंबर को विधानसभा चुनाव है. पूर्वोत्तर राज्यों में यह अकेला है जहां कांग्रेस की सरकार है.

21 फीसदी एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को पता नहीं है कि वे इस जानलेवा बीमारी से पीड़ित हैं

देश में 21 फीसदी एचआईवी पॉजिटिव मरीजों को पता नहीं है कि वे इस जानलेवा बीमारी से पीड़ित है. हिंदुस्तान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट ‘नॉलेज इज पावर’ के हवाले से कहा है कि इसकी वजह से बीमारी के प्रसार का खतरा बना हुआ है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 56 फीसदी मरीजों का ही एंटी रिट्रोवाइटल पद्धति से इलाज हो रहा है. जबकि 23 फीसदी को संक्रमित होने की जानकारी होने के बाद भी इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है. मरीजों में एचआईवी संक्रमण को खत्म करने के लिए एंटी रिट्रोवाइटल थैरेपी दी जाती है. इससे विषाणु संक्रमण को नगण्य स्तर पर लाया जाता है. इसके बाद मरीज सामान्य जीवन जी सकता है.