जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि अगर वे दिल्ली की तरफ देखते सज्जाद लोन को मुख्यमंत्री बनाना पड़ता. इसके लिए इतिहास में उन्हें एक ‘बेईमान आदमी’ के रूप में याद किया जाता. उनके इस बयान को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. सत्यपाल मलिक ने आगे कहा कि कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) यदि सरकार बनाने के इतने ही इच्छुक थे तो उन्हें एक दिन पूर्व उनसे मिलना चाहिए था.

वहीं, उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ने सत्यपाल मलिक को दिल्ली की ओर न देखने को लेकर बधाई दी है. एनसी नेता उमर अब्दुल्ला ने एक ट्वीट में लिखा है, ‘मैं वास्तव में नहीं जानता कि गवर्नर साहब ने ग्वालियर में यह खुलासा क्यों किया. हम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को अच्छी तरह जानते हैं कि वह पैसों के दम पर विधायकों की खरीद-फरोख्त करके राज्य में अपनी सरकार बनाने के लिए बेताब थी. लेकिन हमें इस बारे में भी कुछ पता नहीं कि राजनीतिक तौर पर नियुक्त गर्वनर केंद्र की इच्छाओं के विपरीत क्यों गए.’ उधर, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट में लिखा है, ‘फैक्स मशीन वाले मामले को छोड़ दें तो यह देखकर अच्छा लगता है कि राज्यपाल साहब ने दिल्ली का हुक्म मानने से इंकार करते हुए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को भंग करने का फैसला किया. राज्य के लोकतंत्र की यह घटना अपने आप में अभूतपूर्व हो सकती है.’

बिहार सरकार मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले को कमजोर कर रही है : सुप्रीम कोर्ट

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जमकर फटकार लगाई है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने कहा, ‘राज्य सरकार इस मामले को कमजोर कर रही है. यह बिलकुल वैसा ही है जैसे मौत के मामले पर महज पिटाई का केस दर्ज किया जाए.’ शीर्ष न्यायालय का आगे कहना था कि जिस तरह से मामले की जांच चल रही है, उससे बच्चियों के साथ हुई भयानक घटना का सच सामने नहीं आ पाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की भी बात की है. शीर्ष अदालत ने सीबीआई से कहा, ‘आप सभी मामलों की छानबीन करें. जो सामने आए हैं तथ्य उससे ज़्यादा हैं. बिहार पुलिस न तो आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर रही है और न ही गिरफ्तारी.’

किसानों पर नोटबंदी के बुरे असर को लेकर कृषि मंत्रालय का यू-टर्न

किसानों पर नाेटबंदी के बुरे असर की बात से केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने यू-टर्न ले लिया है. हिंदुस्तान में छपी खबर के मुताबिक मंगलवार को संसद की स्थायी समिति को मंत्रालय ने नई रिपोर्ट सौंपी. इसमें कहा है कि पिछली रिपोर्ट में उससे गलती हो गई थी. कृषि मंत्रालय का अब कहना है कि नोटबंदी की वजह से किसानों पर कोई बुरा असर नहीं हुआ था. इससे पहले बीते हफ्ते मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि नोटबंदी के दौरान नकदी न होने से किसानों को खाद-बीज खरीदने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर उर्जित पटेल ने वित्त मामलों की स्थायी समिति के सामने कहा है कि अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का असर कुछ वक्त के लिए था.

पंडित मदन मोहन मालवीय के पोते गिरिधर मालवीय बीएचयू के अगले चांसलर

पंडित मदन मोहन मालवीय के पोते गिरिधर मालवीय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के अगले चांसलर होंगे. द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक उनके नाम का प्रस्ताव सोमवार को वाइस चांसलर राकेश भटनागर ने एक बैठक में किया था. इसका सभी सदस्यों ने समर्थन किया. इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गिरीधर मालवीय ने इसे गर्व का विषय बताया. इससे पहले उनके पिता गोविंद मालवीय बीएचयू में वीसी की जिम्मेदारी निभा चुके हैं. गिरीधर मालवीय खुद बीएययू के पूर्व छात्र हैं. वे चांसलर करण सिंह की जगह लेंगे.