दिल्ली हाई कोर्ट ने 1984 सिख विरोधी दंगों के मामले में करीब 80 लोगों को दोषी ठहराये जाने और पांच वर्ष जेल की सजा सुनाये जाने के फैसले को बरकरार रखा है. निचली अदालत ने घरों को जलाने और दंगों के दौरान कर्फ्यू का उल्लंघन करने के लिए इन लोगों को दोषी ठहराया था. दोषियों ने इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी.

पूर्वी दिल्ली के त्रिलोकपुरी क्षेत्र में घरों को जलाने और कर्फ्यू का उल्लंघन करने के लिए दो नवंबर, 1984 को गिरफ्तार किए गए 107 लोगों में से 88 लोगों को सत्र अदालत ने 27 अगस्त,1996 को दोषी ठहराया था. दोषियों ने सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का रूख किया था. लेकिन हाई कोर्ट ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखते हुए सभी दोषियों को चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिये हैं.

इस मामले में दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट के मुताबिक 1984 में कुछ ही घंटों के अंतराल में तकरीबन 100 घर फूंक दिए गए थे और हिंसा में 95 लोग मारे गए थे.