भारतीय महिला क्रिकेट टीम के कोच रमेश पवार को उनके ही तौर-तरीके भारी पड़ सकते हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया में सूत्रों के हवाले छपी ख़बर की मानें ताे इस बात की काफ़ी संभावना है कि रमेश पवार की जल्द ही छुट्‌टी हाे जाए. कोच के रूप में उनका अनुबंध और न बढ़ाया जाए. बावज़ूद इसके कि कई खिलाड़ियों को उनके तौर-तरीकों से ज़्यादा दिक्क़त नहीं है.

अख़बार के मुताबिक रमेश पवार के लिए महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान मिताली राज से टकराव मोल लेना भारी पड़ सकता है. ये टकराव बीते कुछ दिनों से लगातार सुर्ख़ियों में बना हुआ है. ख़ास तौर पर वेस्टइंडीज़ में हुए महिला टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल मुकाबले के बाद इससे संबंधित ख़बरें काफ़ी आई हैं. उस मैच में पवार ने मिताली राज को टीम से बाहर रखा था. इसके चलते भारतीय टीम सेमीफाइनल में इंग्लैंड के हाथों बुरी तरह पराजित हो गई थी.

तभी से मिताली ने पवार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है. उन्होंने इस बाबत भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना एडुल्जी पर भी सवाल उठाए हैं. इस बाबत सूत्र भी मानते हैं कि पवार ने मिताली राज को सेमीफाइनल मैच से बाहर रखने का फ़ैसला सीओए के एक ‘ताक़तवर सदस्य’ से फोन पर बातचीत के बाद लिया था. इससे बीसीसीआई के अन्य अधिकारी काफ़ी नाराज़ बताए जाते हैं कि पवार ‘बाहरी दबाव’ के आगे इस तरह आसानी से झुक गए.

सूत्र बताते हैं कि वेस्टइंडीज़ से लौटने के बाद बीसीसीआई अधिकारियों ने पवार से बात की थी. पर उनके पास इन सवालों का कोई ज़वाब नहीं था मिताली राज जब सलामी बल्लेबाज़ हैं तो उन्हें एक मैच के बाद ही मध्य क्रम में क्यों उतारा गया? दूसरा- उन्हें सेमीफाइनल से बाहर क्यों रखा गया, जबकि वे लगातार अच्छे फॉर्म में चल रही थीं? इसके साथ ही बीसीसीआई अधिकारियाें का यह भी मानना है कि मिताली राज और पवार के बीच टकराव से टीम के हौसले पर बुरा असर पड़ रहा है. लिहाज़ा इसे ख़त्म करने एक विकल्प ये हो सकता है कि पवार का कार्यकाल अब और न बढ़ाया जाए. पवार का मौज़ूदा कार्यकाल शुक्रवार 30 नवंबर को ही ख़त्म हो रहा है.