अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मोदी सरकार को झटका लगा है. वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर में अर्थव्यवस्था के विकास की रफ्तार घटकर 7.1 फीसदी हो गई है. पहली तिमाही में ये 8.2 फीसदी रही थी.

खबरों के मुताबिक ताजा गिरावट का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले मजबूत होते रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में उपभोक्ता मांग में आ रही कमी को माना जा रहा है. इसके अलावा कोयला, कच्चा तेल और सीमेंट जैसे अर्थव्यवस्था के आठ बुनियादी क्षेत्रों की विकास दर भी गिरी है. अक्टूबर में इसका आंकड़ा 4.8 प्रतिशत रहा जबकि पिछले साल इसी महीने में ये पांच फीसदी था.

विकास दर में इस गिरावट को आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने निराशाजनक बताया है. हालांकि, उनका कहना था कि वित्तीय वर्ष की दोनों तिमाहियों का औसत निकालें तो विकास दर अच्छी रही है.