रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल के एक सदस्य सतीश मराठे ने शुक्रवार को एक अनोखा सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि कंपनियों को किसी उत्पाद के बारे में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ ही उसके उत्पादन में लगी लागत की भी जानकारी देनी चाहिए. उनका मानना है कि एेसा होगा तभी हम जान सकेंगे कि कंपनियों को कितना मुनाफा हो रहा है.

मुंबई में इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सतीश मराठे ने कंपनियों द्वारा किये जा रहे भारी मुनाफे को सीमित करने की बात कही. उन्होंने बताया कि हाल ही में पाइपलाइन से गैस की आपूर्ति करने वाली एक कंपनी ने आवासीय इलाकों में गैस आपूर्ति का समझौता 16 प्रतिशत मुनाफे के साथ किया. उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह का मुनाफा शुरुआती दिनों में तो ठीक है, लेकिन जब खपत बढ़ जाती है तब इतना भारी मुनाफा कैसे उचित हो सकता है.

मराठे ने मुक्त व्यापार समझौतों से किसी देश को फायदा होने पर भी आश्चर्य जाहिर किया. उन्होंने घरेलू उद्योग के हितों की बेहतर रक्षा के लिये मुक्त व्यापार समझौतों पर विचार करने की भी मांग की. मराठे को केंद्र सरकार ने अगस्त में रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल में नियुक्त किया था. वे घरेलू उद्योगों और स्वदेशी लॉबी के बड़े पैरोकार माने जाते हैं.