राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद तक जाने के लिए हुआ ‘किसान मार्च’ आज सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा में है और सुबह से ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल है. यहां एक बड़े तबके ने किसानों के प्रति अपना समर्थन जताते हुए टिप्पणियां की हैं और केंद्र में सत्ताधारी भाजपा सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है. इसके साथ ही किसानों की तरफ से जारी एक पर्चा भी यहां वायरल हुआ है. इसमें किसानों ने अपने मार्च की वजह से हुई परेशानी के लिए आम नागरिकों से माफी मांगी है और उनसे समर्थन की अपील की है.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित विपक्षी पार्टियों के कई नेता इस मार्च में शामिल हुए थे और इस हवाले से लोगों ने इस विरोध प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं. ट्विटर हैंडल @Gaurav87145966 पर प्रतिक्रिया है, ‘हर पार्टी का किसान मोर्चा बना हुआ है, इसीलिए अब किसान भी किसान कम, नेता ज्यादा लगने लगा है...’

इसके साथ ही ज्यादातर भाजपा समर्थकों ने इसे राजनीतिक विरोध प्रदर्शन बताया है. वहीं चूंकि कई बार भाजपा समर्थक सरकार के खिलाफ होने वाले विरोध प्रदर्शनों पर बेतुकी दलीलें देकर सवाल उठाते हैं. ऐसे ही समर्थकों पर केतन ने तंज करते हुए लिखा है, ‘मोदी विरोध में और गिरते किसान. अब पर्चा छपवाने लगे. इसका पैसा कहां से आया, ये जवाब कौन देगा?’

सोशल मीडिया पर किसान मार्च को लेकर आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

दुष्यंत | @atti_cus

जो लोग कह रहे हैं कि किसान आंदोलन राजनीतिक है, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि जो कुछ भी भारत की जनता को प्रभावित करता है, खासकर गरीबों को, वह राजनीतिक होना ही चाहिए. लोकतंत्र में राजनीति की यही भूमिका है.

आशुतोष उज्ज्वल | facebook

संसद घेरने आए गरीब किसान से मिलकर उसकी सभी मांगें मानने और हर संभव मदद का भरोसा दिलाते मोदी जी.

अतुल खत्री | @one_by_two

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी इतनी ऊंची है कि जब आप इसके शिखर पर पहुंचेंगे, आपको दिल्ली का किसान मार्च साफ-साफ दिखाई देगा.

रफाल गांधी | @RoflGandhi_

किसानों को बार-बार उठकर दिल्ली आना पड़ता है क्योंकि दिल्ली तो पांच साल में सिर्फ एक बार किसान के पास आती है.

मिस्टर कामदार | @jumlesh

किसानों को दिल्ली आने की जरूरत क्या है...जबकि वो सिर्फ पांच रुपये जमा करके नरेंद्र मोदी एप के जरिये अपने खेतों में पिज़्ज़ा खाते हुए, ये सब मांगें रख सकते हैं.