क्या झारखंड में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव भी हो सकता है? सत्ता के गलियारों में यह चर्चा चल रही है कि भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और झारखंड भाजपा के भी प्रमुख नेता यही चाह रहे हैं. यानी अगले साल मार्च-अप्रैल में होने वाले लोकसभा चुनावों के साथ ही झारखंड विधानसभा चुनाव कराने पर गंभीरता से विचार हो रहा है. राज्य विधानसभा का कार्यकाल 2019 के अंत तक है. अगर लोकसभा चुनावों के साथ ही झारखंड विधानसभा चुनाव भी होता है तो यह चुनाव अपने तय समय से तकरीबन छह महीने पहले होगा.

2014 में झारखंड के साथ ही महाराष्ट्र, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव हुए थे. इन चारों राज्यों में भाजपा सत्ता में पहुंचने में कामयाब रही थी. जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग हो गई है लेकिन, बाकी के तीनों राज्यों में अब भी भाजपा सत्ता पर काबिज है. माना जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ ही होंगे.

झारखंड में तय समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने का संकेत पिछले दिनों मुख्यमंत्री रघुबर दास के एक बयान से मिला. रघुबर दास ने कहा कि विधानसभा चुनाव भी लोकसभा चुनावों के साथ ही होते हैं तो इससे काफी समय और संसाधन की बचत होगी और विकास कार्यक्रम कम से कम बाधित होंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद काफी समय से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए कोशिशें कर रहे हैं. इसके लिए बाकायदा मोदी सरकार ने विपक्षी दलों और राज्यों के साथ सहमति बनाने की कोशिश भी की. इस मसले पर विधि आयोग और चुनाव आयोग से भी सरकार ने सलाह-मशविरा किया. इसके बावजूद एक साथ चुनाव कराने को लेकर सहमति नहीं बनी. रघुबर दास ने अपने बयान में प्रधानमंत्री की इस कोशिश का जिक्र भी किया.

लेकिन झारखंड भाजपा के कुछ नेताओं और झारखंड में पार्टी के कामकाज से वाकिफ एक राष्ट्रीय पदाधिकारी से बातचीत करने पर समय से पहले विधानसभा चुनाव कराने की दूसरी वजहें समझ में आती हैं. सबसे पहली तो यह कि खुद रघुबर दास और भाजपा इस बात से डर रहे हैं कि अगर वे सिर्फ विधानसभा चुनावों के लिए झारखंड के लोगों से वोट मांगने जाएंगे तो उन्हें नुकसान हो सकता है. कारण? दरअसल रघुबर दास का यह कार्यकाल उतना सफल नहीं माना जा रहा है जिसके आधार पर भाजपा उनके दूसरे कार्यकाल को लेकर निश्चिंत रहे.

समय से पहले चुनाव कराने की दूसरी वजह यह बताई जा रही है कि झारखंड में पूरा विपक्षी खेमा एकजुट हो रहा है. झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच गठबंधन पक्का हो गया है. भाजपा की ओर से ही झारखंड के मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी की पार्टी झारखंड विकास मोर्चा के बारे में भी यह पता चल रहा है कि वे भी कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के गठबंधन में शामिल हो सकते हैं.

झारखंड की जमीनी स्थिति जो लोग जानते हैं, वे मानते हैं कि अगर ये तीनों एक हो गए तो फिर भाजपा के लिए प्रदेश की सत्ता में वापसी मुश्किल होगी. इस महागठबंधन के साथ लालू यादव का राष्ट्रीय जनता दल (राजद) भी है. वैसे तो राजद झारखंड में बहुत प्रभावी नहीं है लेकिन, कुछ सीटों पर इसका इतना प्रभाव है कि जीत-हार में इसकी एक भूमिका रहती है.

इस महागठबंधन की वजह से प्रदेश भाजपा को यह लगता है कि अगर विधानसभा चुनावों के लिए रघुबर दास के चेहरे पर वोट मांगा जाएगा तो उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है. लेकिन इस महागठबंधन से मुकाबला करना तब अपेक्षाकृत आसान होगा जब वोट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर मांगा जाएगा.

लोकसभा चुनावों के साथ विधानसभा चुनाव कराने से भाजपा को यह फायदा होगा कि पूरा चुनाव अभियान नरेंद्र मोदी के चेहरे और उनकी केंद्र सरकार के कामकाज के आसपास केंद्रित रहेगा. इससे अगर लोकसभा चुनावों के लिए लोग भाजपा के पक्ष में गोलबंद होते हैं तो विधानसभा चुनावों के लिए वे महागठबंधन के पक्ष में मतदान करें, इसकी संभावना काफी कम हो जाएगी. ऐसे में जाहिर है कि भाजपा को फायदा मिल सकता है.

लोकसभा के साथ ही झारखंड विधानसभा चुनाव कराने की संभावना के बारे में प्रदेश भाजपा के एक नेता बताते हैं, ‘प्रदेश भाजपा ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है. केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी हमें तैयार रहने के निर्देश मिले हैं. अभी पक्का नहीं है कि चुनाव एक साथ ही हों लेकिन, हमें तैयार रहने को कहा गया है. आप देखेंगे कि पार्टी विधायक पिछले कुछ दिनों में अपने क्षेत्र में खासे सक्रिय हो गए हैं और जहां हमारे विधायक नहीं हैं, वहां जो टिकट के दावेदार हैं, वे भी सक्रिय हो गए हैं.’