इन दिनों अर्जेंटीना में ‘अंतरराष्ट्रीय व्यापार, अंतरराष्ट्रीय वित्त और कर प्रणाली’ पर जी-20 देशों का 13वां शिखर सम्मेलन चल रहा है. भारत की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके पर भगोड़े आर्थिक अपराधियों से निपटने के लिए जी-20 के सदस्य देशों के बीच एक नौ-सूत्रीय एजेंडा पेश किया है.

पीटीआई के मुताबिक इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों को प्रभावी तौर पर जब्त करने, उनकी यथाशीघ्र वापसी तथा प्रभावी प्रत्यर्पण जैसी कानूनी प्रक्रियाओं में तालमेल बढ़ाने की जरूरत है.’ भारत ने जी-20 देशों से ऐसी प्रणाली विकसित करने में भी सहयोग देने की मांग की है, जिससे भगोड़े आर्थिक अपराधियों को किसी अन्य देश में सुरक्षित पनाह न मिल सके.

इस एजेंडे में कहा गया है, ‘अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र के सिद्धांतों’ विशेषकर अंतरराष्ट्रीय तालमेल से जुड़े सिद्धांतों को पूरे और प्रभावी तरीके से लागू किया जाना चाहिए.’ भारत ने सुझाव दिया है कि बहुपक्षीय वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) से कहा जाए कि वह अंतराष्ट्रीय स्तर पर तालमेल की ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसके तहत संबंधित देशों के बीच सूचनाओं का विस्तृत आदान-प्रदान समय से हो सके.

भारत की तरफ से यह भी कहा गया है, ‘एफएटीएफ को भगोड़े आर्थिक अपराधियों की मानक परिभाषा तय करने का काम भी दिया जाना चाहिए. साथ ही आम राय से कुछ ऐसी मानक प्रक्रियाएं तय करनी चाहिए, जिससे जी-20 देशों को अपने घरेलू कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए मार्गदर्शन और सहायता मिल सके.’

इस अवसर पर नरेंद्र मोदी ने आर्थिक अपराधियों के प्रत्यर्पण के सफल मामलों और प्रत्यर्पण की मौजूदा प्रणालियों में कमियों को भी रेखांकित किया. मोदी ने कहा कि जी-20 को भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों की पहचान शुरू कर देनी चाहिए, ताकि उनके ऊपर उस देश में बकाया करों की वसूली की जा सके जिसके वे निवासी हों.