भारतीय जनता पार्टी 2019 के लोक सभा चुनाव के लिहाज़ से कुछ बिंदुओं पर चिंतित है. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता में किसी तरह की कोई कमी नहीं है. लेकिन द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में सूत्रों के हवाले से आई ख़बर की मानें मो भाजपा के माथे पर बल डालने वाले कुछ पहलू बने हुए हैं. और यह ख़ुद भाजपा का मानना है.

अख़बार को सूत्रों ने बताया है कि भाजपा ने 2019 के लोक सभा चुनाव के लिहाज़ से एक अंदरूनी सर्वे कराया है. यह लगभग चार महीने (बीती जुलाई से अक्टूबर) तक चला और इसमें राजधानी दिल्ली के लगभग 34,000 लोगों को शामिल किया गया. इसके जो नतीज़े आए वे पार्टी के रणनीतिकारों की परेशानी बढ़ाने वाले थे. राहत की बात सिर्फ़ इतनी थी कि 2014 के 59 प्रतिशत के मुकाबले इस वक़्त क़रीब 63 फ़ीसदी लोगों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता बनी हुई है. यानी यह बढ़ी ही है.

अलबत्ता कुछ अन्य मामलों में स्थिति उलट है. इसके मुताबिक केंद्र की प्रमुख योजनाएं लोगों के बीच उतनी लोकप्रिय नहीं हैं, जितनी अपेक्षा की जा रही थी. बताया जाता है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने केंद्र की प्रमुख योजनाओं को कम से कम 50 फ़ीसदी लोगों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. लेकिन यह लक्ष्य अब तक औसत 37 फ़ीसदी के आसपास तक ही हासिल किया जा सका है. यहां तक कि ‘स्वच्छ भारत अभियान’ जैसे कार्यक्रम के प्रति भी लोगों ने बहुत उत्साह नहीं दिखाया है.

सर्वे में नोटबंदी और जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) को तो 48 फ़ीसदी से अधिक लोगों ने ‘ख़राब’ क़दम बताया है. हालांकि ‘जीवन ज्योति बीमा’ (45 प्रतिशत) और ‘उज्जवला’ (53 फ़ीसदी) जैसी योजनाओं के प्रति समर्थन ‘संतोषजनक से बेहतर’ तक दिखा. इसके अलावा 65 फ़ीसद के क़रीब लोगों ने यह भी माना कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में वैश्विक मंच पर भारत की साख बेहतर हुई है, बढ़ी है. हालांकि इससे भाजपा संतुष्ट होगी ऐसा मानना ठीक नहीं होगा क्योंकि चुनाव उसे घरेलू मैदान में लड़ना है.