ब्रिटेन के ईयू (यूरोपियन यूनियन) से बाहर होने का मसला इंग्लैंड में गर्म है. मार्च-2019 की तारीख़ तय हाे चुकी है, जब ब्रिटेन को ईयू से बाहर होना है. लेकिन ख़बरों की मानें तो उससे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा मे पर सत्ता से बाहर होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

ब्रिटिश मीडिया के हवाले से आ रही ख़बरें बताती हैं कि ब्रिटेन के ईयू से बाहर होने की स्थितियां अब भी बहुत स्पष्ट नहीं हैं. इससे ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा मे को अपनी कंज़रवेटिव पार्टी के भीतर और बाहर आलोचनाएं झेलनी पड़ रही हैं. गतिरोध इस बात को लेकर है कि ईयू से बाहर होने के बाद भी ब्रिटेन के उससे कारोबारी संबंध रहें या नहीं. देश में कई लोग इसके समर्थक हैं. लेकिन तमाम ऐसे भी हैं जो ईयू से सभी तरह के संबंध तोड़ लेने के पक्षधर हैं. टेरेसा मे सरकार ने अभी यह एकदम साफ नहीं किया है कि वह ईयू से पूरी तरह बाहर होने के पक्ष में है या नाम मात्र के कारोबारी संबंध बनाए रखने के.

हालांकि सूत्र बताते हैं कि टेरेसा मे दूसरा विकल्प अपना सकती हैं. यही बात उनकी पार्टी सहित तमाम लोगों को नागवार गुजर रही है क्योंकि वे इस रुख़ को जनमत संग्रह (ब्रेक्ज़िट) के नतीज़े की अवहेलना मानते हैं. ब्रेक्ज़िट के जरिए ब्रिटेन की बहुसंख्य आबादी ने ईयू के ब्रिटेन से अलग होने का समर्थन किया था. इसीलिए अब जैसी कि ख़बरें हैं, टेरेसा मे की सरकार के ख़िलाफ़ संसद में अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है. इसके लिए 48 सांसदों के समर्थन की ज़रूरत है. बताया जाता है कि 40 सांसदों का समर्थन जुटा भी लिया गया है.