बीते हफ्ते मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से सेवानितृत्त होने वाले ओपी रावत ने नोटबंदी और चुनाव में काले धन के इस्तेमाल को लेकर एक अहम बात कही है. एनडीटीवी के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘ऐसा माना जा रहा था कि नोटबंदी के बाद चुनाव में इस्तेमाल होने वाले कालेधन पर रोक लगेगी. लेकिन जमीनी हकीकत इससे पूरी तरह इतर है.’ पांच राज्यों के मौजूदा विधानसभा चुनाव से वहां के पूर्व चुनावों की तुलना करते हुए रावत ने कहा है, ‘इस बार यहां पहले से ज्यादा काला धन जब्त किया गया.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इससे पता चलता है कि राजनीतिक दलों और उनके फाइनेंसरों के पास पैसों की कमी नहीं है और इस तरह इस्तेमाल किया जाने वाला धन सामान्य तौर पर काला ही होता है.’ पूर्व चुनाव आयुक्त के मुताबिक, ‘चुनाव में पहले से ही काले धन का इस्तेमाल होता रहा है और इस पर रोक लगाने की कोई व्यवस्था नहीं है.’

आठ नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की थी जिसके बाद पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट चलन से बाहर हो गए थे. तब केंद्र सरकार ने नोटबंदी के फैसले से आतंकवाद, जाली नोट और काले धन पर रोक लगाने में मदद मिलने का दावा किया था. उधर, नोटबंदी की दूसरी सालगिरह को कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने ‘काला दिवस’ के तौर पर मनाया था जबकि केंद्रीय वित्त मंत्री ने उस फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि इससे कर दाताओं की संख्या में बढ़ोतरी के साथ अर्थव्यवस्था को औपचारिक रूप देने में सहायता मिली है.