सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की एक निचली अदालत द्वारा 2002 के दंगों के लिए नरेंद्र मोदी और अन्य लोगों को क्लीन चिट दिए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई जनवरी, 2019 तक के लिए टाल दी है. जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उन्‍हें अभी इस मामले को लेकर दस्‍तावेज इकट्ठा करने के लिए और समय चाहिए, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने तारीख आगे बढ़ा दी. जाकिया जाफरी कांग्रेस के सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं. 2002 में गोधराकांड के बाद भड़के दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में एहसान जाफरी की हत्या कर दी गई थी.

द इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक यह याचिका 26 नवंबर को भी जस्टिस एएम खानविलकर और दीपक गुप्ता के सामने सुनवाई के लिए आयी थी. तब इस पर सुनवाई एक हफ्ते के लिए टाल दी गई थी. इससे पहले भी इस मामले की सुनवाई 19 नवंबर को एक सप्ताह तक टाली गई थी.

गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाए गए विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 2012 में नरेंद्र मोदी सहित अन्य आरोपितों को क्लीन चिट देते हुए इस मामले पर निचली अदालत में एक क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. इसके खिलाफ 2017 में जाकिया जाफरी ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा था. इसके बाद जाकिया इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गई थीं.

इस याचिका के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में एसआईटी की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी पेश हुए थे. यहां उन्होंने दलील दी कि जाकिया जाफरी की याचिका सुनवाई के लिए योग्य नहीं है. वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गुजरात की निचली अदालत और गुजरात हाई कोर्ट जाकिया जाफरी की याचिका को पहले ही खारिज कर चुके हैं.