उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सोमवार को भीड़ की हिंसा में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत के मामले को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक रंग दिए जाने की कोशिश की जा रही है. इस काम में मीडिया का एक हिस्सा भी हाथ बंटाता दिख रहा है. दरअसल इस घटना के कुछ ही देर बाद एक दक्षिणपंथ समर्थक चैनल के संपादक ने ट्वीट करके यह जताने की कोशिश की कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की मौत का संबंध बुलंदशहर में चल रहे इज्तिमा से है. नीचे आप उनके ट्वीट देख सकते हैं.

पहले ट्वीट में सुदर्शन चैनल के संपादक सुरेश चव्हाणके इस घटना को ‘बुलंदशहर_इज्तिमा का बवाल’ बता रहे हैं. इज्तिमा का मतलब मुस्लिम समाज के लोगों के एक जगह इकट्ठा होने से है. यह सम्मेलन या कार्यक्रम धार्मिक शिक्षा सीखने-सिखाने के लिए आयोजित किया जाता है. बहरहाल, पुलिस इंस्पेक्टर की मौत की घटना को इज्तिमा से जोड़ते हुए चव्हाणके स्थानीय लोगों के हवाले से बताते हैं कि स्कूलों में बच्चे फंस गए, कई लोग जंगल में रह गए और कइयों ने घर के दरवाज़े बंद कर लिए.

वहीं, दूसरे ट्वीट में सुरेश चव्हाणके सुबोध कुमार की मौत के मामले से कहीं और पहुंच जाते हैं. वे हैशटैग #बुलंदशहर_इज्तेमा लिखकर कहते हैं कि इस सम्मेलन के आयोजक ‘तब्लीगी जमात’ सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर पहले से है. आगे उन्होंने और आरोप भी लगाए हैं जिन्हें आप ट्वीट में (ऊपर) पढ़ सकते हैं.

लेकिन बुलंदशहर की पुलिस ने सुदर्शन चैनल के संपादक के ट्वीट को ख़ारिज किया है. उसने अपने ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट किया है. इसमें पुलिस ने बाक़ायदा चव्हाणके के ट्वीट का ज़िक्र करते हुए कहा है, ‘कृपया भ्रामक ख़बर न फैलाएं. इस घटना का इज्तिमा कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं है. इज्तिमा सकुशल सम्पन्न समाप्त हुआ है. उपरोक्त घटना इज्तिमा स्थल से 45-50 किलोमीटर दूर थाना स्याना क्षेत्र में घटित हुई है जिसमें कुछ उपद्रवियों द्वारा घटना कारित की गई है. इस संबंध मे वैधानिक कार्यवाही की जा रही है.’ नीचे पुलिस के ट्वीट को देखा जा सकता है.

सुरेश चव्हाणके के ट्वीट को ख़ारिज करता बुलंदशहर पुलिस का ट्वीट
सुरेश चव्हाणके के ट्वीट को ख़ारिज करता बुलंदशहर पुलिस का ट्वीट

साफ़ है कि मुस्लिम समुदाय के कार्यक्रम को ज़बरदस्ती इस घटना से जोड़ा जा रहा है. उधर, इस घटना की जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन कर दिया है. उसकी रिपोर्ट में क्या जानकारी सामने आएगी यह अभी देखने वाली बात है. हालांकि पुलिस की शुरुआती जांच के आधार पर कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि यह पूरा हंगामा एक साज़िश के तहत किया गया हो सकता है.

हिंदुस्तान की एक रिपोर्ट में पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि घटनास्थल के नज़दीक खेत में दिखावे के लिए गाय के अवशेष जगह-जगह लटका कर रखे गए थे. रिपोर्ट में अधिकारियों और पुलिस सहित ग्रामीणों के भी बयान दर्ज किए जाने की बात कही गई है. इस बारे में रिपोर्ट में लिखा है, ‘महाव गांव में घटनास्थल पर पहुंचने वालों में सबसे पहले प्रशासनिक अधिकारियों में स्याना तहसीलदार राजकुमार भास्कर थे. उनका कहना है कि ईख के कई खेतों में गोवंश कटान कर रखा था. गाय के सिर और खाल आदि अवशेष गन्ने पर लटका रखे थे जो दूर से ही दिख रहे थे. उनका कहना है कि यदि कोई व्यक्ति गोकशी करेगा तो वह अवशेषों को इस तरह से नहीं लटकाएगा. आरोपी यही चाहेगा कि किसी को इस बात का पता नहीं चले. ऐसे में अधिक संभावना यही है कि सिर्फ़ माहौल को भड़काने के लिए गोकशी की गई हो.’

ये तथ्य जानने के बाद इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर आ रही किसी भी जानकारी को दो बार चेक किया जाना चाहिए. सुरेश चव्हाणके के ट्वीट या तो इस गलती का नतीजा हैं या फिर जानबूझकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश.