उद्योगपति अनिल अंबानी कर्ज़ के बोझ से बुरी तरह दबे हुए हैं. दिए गए कर्ज़ को न चुकाने की वज़ह से उनके कर्ज़दाता बैंकों ने अदालत की शरण ले ली है. फ्रांस और भारत के बीच रफाल लड़ाकू विमानों के सौदे में उनकी कंपनी- रिलायंस डिफेंस को साझीदार बनाए जाने की वज़ह से कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल उन पर आए दिन हमले करते रहते हैं. तरह-तरह के आरोप लगाते रहते हैं. इसी बीच अब ख़बर आई है कि नौसेना ने भी अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ाने का काम कर दिया है.

द इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस नेवल एंड इंजीनियरिंग लिमिटेड (आरएनईएल) को नौसेना के लिए पांच गश्ती जहाज/नौका (नेवल ऑफशोर पेट्रोल वैसेल्स- एनओपीवी) बनाने का ठेका दिया गया था. लगभग 2,500 करोड़ रुपए का यह ठेका 2011 में हुआ था. लेकिन इसके तहत आपूर्ति के लिए जो समय सीमा तय की गई थी उसके चार साल बीत जाने के बाद भी अब तक कंपनी नौसेना को कोई एनओपीवी बनाकर नहीं दे सकी है.

सूत्र बताते हैं कि इस स्थिति के मद्देनज़र नौसेना ने इस साल के शुरूआत में ही आरएनईएल की लगभग 100 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी भुना (एनकैश करना) ली है. हालांकि इसके बाद अाएनईएल ने वादा किया है कि वह अगले साल के मध्य तक पहला एनओपीवी नौसेना को उपलब्ध करा देगी. कंपनी गुजरात के पीपावाव शिपयार्ड (जहां जहाज बनाए जाते हैं) मे एनओपीवी बना रही है. वह जुलाई-2017 में पहले दो एनआेपीवी बनाने का काम शुरू कर सकी है.

अख़बार के मुताबिक नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने ख़ुद इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि की है. हालांकि लांबा ने यह भी जोड़ा है कि अभी आरएनईएल को दिया गया एनओपीवी का ठेका रद्द नहीं किया गया है. लेकिन इस पर पुनर्विचार ज़रूर किया जा रहा है. सूत्र बताते हैं कि इसके साथ ही लगभग 20,000 करोड़ रुपए के एक अन्य ठेके पर भी संशय के बादल मंडरा रहे हैं. यह भी आरएनईएल को देने की तैयारी थी. लेकिन अब इस पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है.