इनकम टैक्स रिटर्न भरने के मामले में पिछले साल के मुकाबले इस साल अब तक 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. वित्त मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने आज यह जानकारी दी है. पीटीआई के मुताबिक केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने इनकम टैक्स रिटर्न में हुई वृद्धि को ‘नोटबंदी का असर’ बताया है. उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी देश में कर का दायरा बढ़ाने के लिए काफी अच्छी रही है. इस साल हमें अभी तक ही करीब 6.08 करोड़ आईटीआर मिल चुके हैं जो पिछले साल की इस तिथि तक मिले आईटीआर से 50 प्रतिशत अधिक हैं.’

सुशील चंद्रा ने उम्मीद जताई कि राजस्व विभाग चालू वित्त वर्ष के दौरान 11.5 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर संग्रह करने का लक्ष्य प्राप्त कर लेगा. सीबीडीटी के चेयरमैन ने कहा, ‘हमारे सकल प्रत्यक्ष कर में 16.5 प्रतिशत और शुद्ध प्रत्यक्ष कर में 14.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है. इससे पता चलता है कि नोटबंदी से कर दायरा बढ़ाने में वास्तव में मदद मिली है.’ चंद्रा के मुताबिक नोटबंदी के कारण कॉर्पोरेट कर दाताओं की संख्या पिछले साल के सात लाख की तुलना में बढ़ कर आठ लाख हो चुकी है. इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान के तहत 70 देश भारत के साथ सूचनाएं साझा कर रहे हैं.

सुशील चंद्रा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नोटबंदी को लेकर यह विचार मजबूत होता जा रहा है कि यह अपने मकसद में कामयाब नहीं हुई. कुछ ही दिन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने भी नोटबंदी को लेकर कहा था कि इससे चुनाव में काले धन के इस्तेमाल पर कोई फर्क नहीं पड़ा है. एनडीटीवी के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘ऐसा माना जा रहा था कि नोटबंदी के बाद चुनाव में इस्तेमाल होने वाले काले धन पर रोक लगेगी. लेकिन जमीनी हकीकत इससे पूरी तरह इतर है.’ पांच राज्यों के मौजूदा विधानसभा चुनाव से वहां के पूर्व चुनावों की तुलना करते हुए रावत ने कहा है, ‘इस बार यहां पहले से ज्यादा काला धन जब्त किया गया.’