पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. लोकसभा सांसद रहे अजहर तेलंगाना कांग्रेस के चौथे कार्यकारी अध्यक्ष हैं. यानी अब वहां कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के साथ चार-चार कार्यकारी अध्यक्ष काम कर रहे हैं.

तेलंगाना में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अजहर को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने को इन चुनावों से ही जोड़ा जा रहा है. दरअसल, तेलंगाना में मुस्लिम समाज के वोट कई पार्टियों के बीच बंट रहे हैं. सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समिति भी इस समाज के लोगों को अपने पाले में लाना चाह रही है. वहीं असद्दुदीन ओवैसी की पार्टी हैदराबाद और उसके आसपास के इलाकों के साथ कुछ शहरी केंद्रों पर भी प्रभावी है.

इस वजह से कांग्रेस को प्रदेश में मुस्लिम वोटों में बिखराव की आशंका सता रही है. उसे लगता है कि प्रदेश में अभी जो स्थिति है उसमें मुस्लिम वोट तीन खेमों में बंटता हुआ दिख रहा है. इनमें से एक पक्ष सत्ताधारी टीआरएस का है तो दूसरा कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन का. वहीं कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम समाज का कुछ हिस्सा ओवैसी की पार्टी के पक्ष में भी जा सकता है. इससे कांग्रेस को यह डर है कि उसे कहीं सबसे अधिक नुकसान न हो.

तेलंगाना के मुस्लिम वोटों को एकजुट करने और उन्हें कांग्रेस-टीडीपी गठबंधन के पक्ष में लाने के मकसद से कांग्रेस इस समाज के लोगों को यह बताने की कोशिश कर रही है कि टीआरएस और ओवैसी दोनों की भाजपा के साथ अंदर ही अंदर सांठ-गांठ है. खुद राहुल गांधी टीआरएस को भाजपा की बी-टीम और ओवैसी को भाजपा की सी-टीम कह रहे हैं.

इस पृष्ठभूमि में कांग्रेस और तेलगूदेशम पार्टी को यह डर सता रहा है कि कहीं मुस्लिम वोटों में विभाजन न हो और इससे उन्हें नुकसान न हो. बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने इसी खतरे से बचने के लिए अजहर को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. कांग्रेस को लगता है कि अगर मुस्लिम समाज के लोगों को यह लगा कि उनके समाज के लोगों को पार्टी में तवज्जो दी जा रही है तो पार्टी के पक्ष में उनकी गोलबंदी बढ़ सकती है. कांग्रेस ने तेलंगाना में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया है. ऐसे में अजहर को कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि अगर तेलंगाना में उसकी सरकार बनती है तो अजहर की कोई प्रमुख भूमिका हो सकती है.

2014 के विधानसभा चुनावों में पड़े वोटों के आधार पर अंकगणित कांग्रेस और टीडीपी गठबंधन के पक्ष में है. पिछले चुनावों में ये दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं. लेकिन इन दोनों के मत प्रतिशत को जोड़ दिया जाए तो यह टीआरएस को मिले वोटों से अधिक है. ऐसे में कांग्रेस को यह लगता है कि अगर अजहर को आगे करके मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में लाने में कामयाबी मिलती है तो तेलंगाना में उसकी सरकार बन सकती है.

अजहर की नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि इसके पहले प्रदेश कांग्रेस की टीम में उनके पास कोई पद नहीं था. अब तक उन्होंने जो दो लोकसभा चुनाव लड़े हैं, उनमें से कोई उन्होंने तेलंगाना से नहीं लड़ा. 2009 का लोकसभा चुनाव उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से लड़ा था और कामयाबी हासिल की थी. वहीं 2014 का लोकसभा चुनाव वे राजस्थान के टोंक-माधोपुर से लड़े थे लेकिन जीत नहीं पाए. ऐसे में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस की टीम में अजहर को शामिल किए जाने के कई राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं.

जानकारों के मुताबिक आंध्र प्रदेश से तेलंगाना के अलग होने के बाद कांग्रेस में अभी कोई भी ऐसा चेहरा नहीं है जिसकी पूरे प्रदेश में अपनी एक राजनीतिक पहचान हो या जिसके नाम पर कांग्रेस चुनाव जीतने की उम्मीद कर सके. कुछ लोग तो यह भी कह रहे हैं कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तेलंगाना कांग्रेस में अजहर को ठीक से सक्रिय करना चाहते हैं. उनको ऐसा लगता है कि अजहर के रूप में पार्टी के पास एक ऐसा चेहरा है जिसकी अपनी एक अलग पहचान है और जिसका अब तक ठीक से प्रदेश में इस्तेमाल नहीं हुआ.

क्रिकेट खिलाड़ी के तौर पर अजहर को लोग पूरे देश में जानते रहे हैं. जाहिर है कि तेलंगाना में भी लोग उन्हें जानते हैं. लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर लोकप्रिय अजहर एक नेता के तौर पर कितने स्वीकार्य होते हैं, यह तो चुनावी नतीजों से ही पता चल पाएगा. चर्चा तो यह भी है कि 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस अजहर को तेलंगाना की सिकंदराबाद लोकसभा सीट से लड़ा सकती है.