भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो रेट (या दर) नहीं बदलते हुए इसे 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिन चली समीक्षा बैठक के बाद आज यह जानकारी दी गई. आरबीआई ने रिवर्स रेपो दर में भी कोई बदलाव न करते हुए इसे 6.5 प्रतिशत पर ही रखा है. इसके अलावा उसने 2018-19 में भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की विकास दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है. वहीं, महंगाई दर दूसरी छमाही में 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है.

आरबीआई का कहना है कि कच्चे तेल के दामों में आई गिरावट और महंगाई के उम्मीद के मुताबिक कम रहने की वजह से उसने रेपो दर में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है. खबरों के मुताबिक केंद्रीय बैंक के इस फैसले से आम आदमी को कोई फायदा या घाटा नहीं होने वाला, क्योंकि दरों में कोई बदलाव नहीं होने की वजह से होम लोन व कार लोन की ब्याज दरें पहले की तरह बनी रहेंगी.

आरबीआई ने ब्याज दरें तो नहीं बढ़ाईं लेकिन, उसने आउटलुक कैलिब्रेटिंग टाइटनिंग बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि आगे रेपो दर में इजाफा किया जा सकता है. एमपीसी की अगली बैठक अब अगले साल पांच से सात फरवरी के बीच होगी.

क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई अन्य बैंकों को कर्ज देता है. इसी कर्ज से बैंक ग्राहकों को ऋण की सुविधा मुहैया कराते हैं. अगर रेपो रेट कम होता है तो इसका मतलब है कि बैंक से मिलने वाले सभी प्रकार के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. वहीं, बैंकों को आरबीआई में धन जमा कराने पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.