बीते महीने की शुरुआत में जब भारतीय क्रिकेट टीम ऑस्ट्रेलिया पहुंची तो सबसे ज्यादा चर्चाएं टेस्ट सीरीज को लेकर शुरू हुईं. ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही देशों के क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि भारत की टीम पहली बार ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीत सकती है. इसका कारण वे यह बताते हैं कि भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया की अब तक की सबसे कमजोर टीम से हो रहा है. भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का कहना था, ‘डेविड वार्नर और स्टीव स्मिथ का न होना भारतीय टीम के लिए इस बार एक बड़े मौके जैसा है.’ पूर्व आॅस्ट्रेलियाई बल्लेबाज डीन जोंस के शब्द थे, ‘अभी नहीं तो फिर कभी नहीं. भारत अगर इस बार भी आॅस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज नहीं जीता तो भविष्य में कभी नहीं जीत पाएगा.’

केवल क्रिकेट विश्लेषक ही नहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम भी इस बात को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर रही है. एडिलेड में होने वाले पहले टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर ऑस्ट्रेलियाई टीम के कोच जस्टिन लेंगर का कहना था, ‘भारतीय टीम शिकार को सूंघ चुकी है. ठीक उसी तरह जैसे 2001 में आस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम ने किया था. हम भारत में जीतने से मामूली अंतर से चूक गए और 2004 में हमने जीत दर्ज की. मुझे लगता है कि भारत बिलकुल वैसा ही महसूस कर रहा होगा.’

हालांकि, कुछ विश्लेषक ऐसे भी हैं जो ऑस्ट्रेलिया की इस कमजोरी से तो सहमत नजर आते हैं लेकिन, यह भी कहते हैं कि एक कमजोरी के कारण ऑस्ट्रेलिया की मजबूती को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. अपने एक शो में क्रिकेट विश्लेषक हर्षा भोगले कहते हैं, ‘इस समय ऑस्ट्रेलिया का गेंदबाजी आक्रमण एडिलेड जैसी पिचों पर दुनिया का सबसे बेहतरीन गेंदबाजी आक्रमण कहा जा सकता है. उनके पास इस मोर्चे पर सब कुछ है.’ उनके मुताबिक यह बात भी ध्यान में रखने वाली है कि ऑस्ट्रेलियाई पेसरों को अपने यहां की पिचें उसी तरह रास आती हैं जिस तरह भारतीय स्पिन गेंदबाजों को भारतीय पिचें.

ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज बनाम भारतीय तेज गेंदबाज

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज एड्म गिलक्रिस्ट एक साक्षात्कार में कहते हैं कि इस बार भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हो रही टेस्ट सीरीज में मुख्य मुकाबला दोनों देशों के तेज गेंदबाजों के बीच ही होना है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया आई भारतीय टीम की गेंदबाजी भी अब तक के हर भारतीय आक्रमण से कहीं बेहतर है.

अगर दोनों देशों के तेज गेंदबाजों के पिछले कुछ समय के प्रदर्शन और आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक साल में दोनों ही टीमों के बेहतर प्रदर्शन में मुख्य भूमिका इन्हीं की रही है. मिचेल स्टार्क, जोश हेजलवुड और पैट कमिंश की तिकड़ी ने ही पिछली एशेज सीरीज में इंग्लैंड को धराशायी कर दिया था. इस सीरीज में पैट कमिंश ने 23 विकेट, मिचेल स्टार्क ने 22 और जोश हेजलवुड ने 21 विकेट झटके थे. इस पूरी एशेज सीरीज में इंग्लैंड का कोई भी गेंदबाज विकेट लेने के मामले में इन तीन के आस-पास भी नहीं पहुंच सका था. ऑस्ट्रेलिया ने यह सीरीज 4-0 से जीती थी. इसके अलावा पिछले एक साल में खेले सात टेस्ट मैचों में पैट कमिंश ने 38 विकेट, मिचेल स्टार्क ने 24 और जोश हेजलवुड ने 26 विकेट लिए हैं.

जोश हेजलवुड और मिचेल स्टार्क | फोटो : एएफपी
जोश हेजलवुड और मिचेल स्टार्क | फोटो : एएफपी

उधर, ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाजों के इस प्रदर्शन की तुलना भारतीय तेज गेंदबाजों के प्रदर्शन से करने पर दोनों लगभग बराबरी पर ही नजर आते हैं. दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड सहित पिछले एक साल में खेली गयी टेस्ट सीरीजों में भारतीय स्पिनरों से ज्यादा तेज गेंदबाज सफल हुए हैं. पिछले नौ मैचों में मोहम्मद शमी ने 33 विकेट, ईशांत शर्मा ने आठ मैचों में 30, जसप्रीत बुम्राह ने छह मैचों में 28, उमेश यादव ने चार मैचों में 18 और भुवनेश्वर कुमार ने दो मैचों में 10 विकेट लिए हैं. गौर करने वाली बात यह भी है कि दक्षिण अफ्रीका औए इंग्लैंड में भले ही भारतीय टीम टेस्ट सीरीज हार गई हो, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाजों ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंकाया था.

एड्म गिलक्रिस्ट इस सीरीज में गेंदबाजी मोर्चे पर कई चीजें भारतीय टीम के हक़ में मानते हैं. वे कहते हैं कि भले ही ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज अपनी पिचों से ज्यादा अच्छे से परिचित हों. लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भारतीय गेंदबाज जो दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड की तेज पिचों पर बेहतरीन प्रदर्शन करके आये हैं, ऑस्ट्रेलिया में अच्छा समय बिता चुके हैं. इसके अलावा विराट कोहली के पास ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा विकल्प हैं क्योंकि उन्हें अपने सबसे बेहतर पांच गेंदबाजों में से तीन का चयन करना है. जबकि, ऑस्ट्रेलिया के पास कुल मिलाकर तीन तेज गेंदबाज ही हैं जिन्हें उसे हर मैच में खिलाना है. गिलक्रिस्ट के मुताबिक यह तब और मुश्किल हो जाता है जब चार टेस्ट मैचों की सीरीज को एक महीने में निपटाना हो.

रविचंद्रन अश्विन का प्रदर्शन चिंता का विषय

एडिलेड की पिच के इतिहास को देखते हुए भारतीय टीम को एक ऑफ स्पिनर को अंतिम ग्यारह में रखना अनिवार्य है. लेकिन, उसके आगे सबसे बड़ी दिक्क्त यह है कि उसके प्रमुख स्पिन गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन ऑउट ऑफ फॉर्म चल रहे हैं. दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में भी अश्विन का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा जैसी उनसे उम्मीद की जा रही थी. साथ ही ऑस्ट्रेलिया में उनका पिछला प्रदर्शन भी कुछ ख़ास नहीं रहा है. अश्विन ने अब तक अपने करियर में 25.44 के औसत से 336 विकेट लिए हैं. लेकिन, ऑस्ट्रेलिया में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले छह टेस्ट मैचों में उन्होंने 54.77 के औसत से सिर्फ 21 विकेट ही झटके हैं. बीते हफ्ते खेले गए एक अभ्यास मैच में उनके प्रदर्शन ने निश्चित ही विराट कोहली को और चिंतित कर दिया होगा. ऑस्ट्रेलियाई एकादश के खिलाफ हुए इस मैच में उन्होंने 122 रन देकर केवल दो विकेट ही हासिल किए.

क्यों ऑस्ट्रेलियाई स्पिनर नैथन लियोन को लेकर भी रणनीति बनानी जरूरी

एडिलेड की पिच पर जहां भारत के लिए आर अश्विन महत्वपूर्ण हैं, वैसे ही ऑस्ट्रेलिया के लिए ऑफ स्पिनर नैथन लियोन. इस समय ऑस्ट्रेलिया की टीम में ऑफ स्पिनर लियोन सबसे अनुभवी खिलाड़ी हैं. वे शेन वार्न और रिची बेनॉड के बाद टेस्ट इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल स्पिनर भी हैं. उन्होंने अपने टेस्ट जीवन का दूसरा सबसे शानदार प्रदर्शन भी भारत के खिलाफ 2014 में एडिलेड की पिच पर ही किया था. इस मैच उन्होंने 12 विकेट लेकर भारत के हाथ से मैच छीन लिया था. तब इस पूरी सीरीज में लियोन ने 23 विकेट लिए थे, जबकि अश्विन 12 विकेट ही ले सके थे. नैथन लियोन की सबसे बड़ी खूबी यही है कि ऑस्ट्रेलिया की तेज पिचों पर भी उनकी चकरी खूब घूमती है. पिछली एशेज सीरीज में भी उन्होंने 21 विकेट लिए थे. इन आंकड़ों को देखते हुए साफ़ है कि भारतीय टीम को नैथन लियोन से निपटने के लिए एक अच्छी रणनीति बनानी होगी.