‘फर्ज़ और फर्ज़ी में बस एक मात्रा का फर्क होता है,’ ‘उरी’ के ट्रेलर में आपको सबसे पहले यही संवाद सुनाई पड़ता है. ट्रेलर से अलग अगर इसकी व्याख्या की जाए तो यह कुछ यूं हो सकती है कि जो व्यक्ति अपना फर्ज (काम) ठीक से नहीं निभाता, उसे फर्जी कहा जाना चाहिए. यह कहने के बाद बुरा यह होता है कि इन झलकियों के लिए भी यह लाइन जस की तस दोहराई जा सकती है. यानी इसे देखते ही इस बात का संशय पैदा हो जाता है कि क्या यह सिनेमा अपने मनोरंजन नाम के फर्ज़ को अंज़ाम दे पाएगा!

साल 2016 में भारत द्वारा पाकिस्तान की सीमा में की गई अति-विवादित और चर्चित सर्जिकल स्ट्राइक पर आधारित यह कहानी देशभक्ति और वीर-रस से भरी जरूर लग रही है. लेकिन इसमें वजन होने की संभावना उतनी ही नज़र आती है, जितना विपक्ष इस घटना से जुड़े सरकारी दावों में सच देख पाता है.

यहां पर नायक बने विकी कौशल फौजी वर्दी पहनकर और इंटेस-लुक अपनाकर इससे पहले ‘राज़ी’ में भी दिल जीत चुके हैं. ‘उरी’ में उनकी भूमिका में खास बात यह है कि इस बार वे ढेर सारा एक्शन करने के साथ-साथ, सनी देओल के स्टाइल में दहाड़ मारते हुए कई डायलॉग भी बोलने वाले हैं. इसमें वे कितने बनावटी लगेंगे, इसका अंदाजा भी ट्रेलर दे देता है. उनके अलावा सुंदर-सलोनी यामी गौतम भी फिल्म में हैं जो अपने अतिसौम्य चेहरे के साथ रौद्र रस से भरे संवाद बोलते हुए प्लास्टिक लग रही हैं. बाकी तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर और वर्तमान मुख्य सुरक्षा सलाहकार, अजीत डोभाल से मिलते-जुलते किरदार भी ट्रेलर में दिखाई देते हैं. हालांकि वे कौन हैं और क्या करेंगे, ट्रेलर में यह खोजना और अंदाजा लगाना एक मजे वाला खेल हो सकता है.

कुल मिलाकर, करीब ढाई मिनट का यह ट्रेलर जल्दबाजी में लिखी गई एक स्क्रिप्ट पर, अति की जल्दबाजी में बनाई गई एक फिल्म का एहसास करवाता है. ‘आक्रोश’, ‘काबुल एक्सप्रेस,’ ‘तेज’ जैसी फिल्मों की पटकथा लिख चुके आदित्य धर इस फिल्म से बतौर निर्देशक डेब्यू करने जा रहे हैं. हालांकि हम कहना तो चाहते हैं धर कोई ऐसा करिश्मा दिखाएं कि ‘उरी’ से जुड़ी सारी अटकलें गलत साबित हों लेकिन सस्ती भाषा में लिखे गए, इसके संवाद ऐसा कहने से रोक लेते हैं. ऐसे में 11 जनवरी को फिल्म की रिलीज का इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.

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