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भारत की सबसे उम्रदराज यूट्यूब स्टार ग्रैनी (दादी) मस्तानम्मा ने 107 साल की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह दिया. उन्होंने आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में सोमवार को आखिरी सांस ली. मस्तानम्मा की अलग-अलग खाना बनाने की विधियां यूट्यूब पर खासी पसंद की जाती थीं. खाना पकाने के उनके देसी और अनोखे तरीके के फैन केवल भारतीय ही नहीं विदेशी भी थे. इस बात का अंदाज आप कंट्री फूड नाम के एक चैनल पर उनके वीडियोज़ को मिले कॉमेंट्स से लगा सकते हैं. यह चैनल उनके पोते के लक्ष्मण और उनके दोस्त श्रीनाथ रेड्डी ने शुरू किया था. इस चैनल के करीब 12 मिलियन (1 करोड़ 20 लाख) सब्सक्राइबर्स हैं. वॉटरमेलन (तरबूज) में चिकन बनाती दादी के इस वीडियो को अब तक इस चैनल पर करीब एक करोड़ से ज्यादा बार देखा गया है.

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100 की उम्र पार कर चुकी एक महिला, मस्तानम्मा जिसके नाम का ही मतलब है खुश व्यक्ति, को चूल्हे पर शून्य से शुरू करते हुए एक बेहतरीन रेसिपी बनाते देखना, अपने आप में रोमांचित करने वाला अनुभव होता था. उन्हें वॉटरमेलन चिकन के ही जैसे वॉटरमेलन एग भुर्जी बनाते देख बस हैरत ही होती है. देखने में आसान से लगने वाले ये तरीके उनके दशकों के तजुर्बे का नतीजा थे.

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वैसे तो सुमद्री व्यंजन (सीफूड) या फिर मांसाहार बनाना उनकी खासियत थी, लेकिन मस्तानम्मा शाकाहारी भोजन भी उसी कुशलता से पकाती थीं. उन्हें शिमला मिर्च और टमाटर की तरकारी बनाते हुए देखकर यह बात आप आसानी से समझ सकते हैं.

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अगर कहीं आपको गांव, बागीचा और एक बुढ़िया दादी को खाना पकाते देखकर ये लग रहा है कि वे केवल देसी खाना ही पकाती थीं, तो घोर विदेशी ‘पिज्जा’ बनाते हुए उनके इस वीडियो को देखकर आपका ये भ्रम भी टूट जाएगा. यहां रसोई के कोई भी आधुनिक उपकरणों के बिना पिज्जा बनाते समय उनका आत्मविश्वास देखते बनता है.

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मस्तानम्मा की इस हरफनमौला प्रतिभा के कारण ही लोग उनके दीवाने थे. उनकी ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक साल पहले बीबीसी ने भी उनके बारे में एक स्टोरी की थी. इसलिए पिछले लगभग छह महीने से जब उनका कोई वीडियो यूट्यूब पर नहीं आया तो लोगों ने चैनल के कॉमेंट्स सेक्शन में उनके बारे में पूछना शुरू कर दिया. जिसका जवाब कंट्री फूड ने सोमवार को मस्तानम्मा की अंतिम यात्रा की वीडियो शेयर करके दिया. खबरों के अनुसार मस्तानम्मा की शादी 11 साल की उम्र में हो गई थी. जब वे 22 साल की थीं तब उनके पति गुजर गए. उनके पांच बच्चे थे जिन्हें उन्होंने अकेले पाला. आज उनके बच्चों में से भी केवल एक ही जीवित है. मस्तानम्मा को चाहने वाले लोगों के लिए उनकी अचानक आई मौत की खबर किसी अचम्भे से कम नहीं थी.