केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने आज केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के दो शीर्ष अधिकारियों की खींचतान की वजह से पैदा हुए संकट को लेकर अहम टिप्पणी की. सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा से अधिकार वापस लेने और उन्हें छुट्टियों पर भेजने के केंद्र के फैसले के खिलाफ उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान सीवीसी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि असाधारण परिस्थितियों के लिए असाधारण उपायों की जरूरत है.

पीटीआई के मुताबिक सीवीसी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत के फैसलों और सीबीआई को संचालित करने वाले कानूनों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि (सीबीआई पर) आयोग की निगरानी के दायरे में इससे जुड़ी ‘आश्चर्यजनक और असाधारण परिस्थितियां ’भी आती हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘सरकार की कार्रवाई के पीछे की भावना संस्थान के हित में होनी चाहिए.’ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार को ‘निष्पक्षता’ रखनी होगी.

शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सीबीआई निदेशक और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच झगड़ा रातोंरात सामने आया जिसकी वजह से सरकार को चयन समिति से परामर्श किए बिना निदेशक के अधिकार वापस लेने को विवश होना पड़ा हो. पीठ ने कहा कि अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने उसे बताया है कि जिन परिस्थितियों में ये हालात पैदा हुए उनकी शुरुआत जुलाई में ही हो गई थी.

शीर्ष अदालत ने पूछा कि सीबीआई निदेशक से अधिकार वापस लेने से पहले चयन समिति से परामर्श लेने में क्या मुश्किल थी. सीजेआई ने सीवीसी से यह भी पूछा कि किस वजह से उन्हें यह कार्रवाई करनी पड़ी. इस पर मेहता ने अदालत से कहा कि सीबीआई के शीर्ष अधिकारी मामलों की जांच करने के बजाय एक दूसरे के खिलाफ मामलों की तफ्तीश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सीवीसी के अधिकार क्षेत्र में जांच करना शामिल है, अन्यथा वह कर्तव्य में लापरवाही की दोषी होगी. सीवीसी के मुताबिक अगर उसने कार्रवाई नहीं की होती तो राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के प्रति जवाबदेह होती.