पश्चिम बंगाल सरकार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कूचबिहार से प्रस्तावित ‘रथ यात्रा’ को अनुमति देने से इंकार कर दिया है. इसका कारण देते हुए सरकार ने कहा कि रथ यात्रा से सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है. पश्चिम बंगाल सरकार के महाधिवक्ता (एजी) किशोर दत्ता ने आज कलकत्ता उच्च न्यायालय को इस संबंध में जानकारी दी. पीटीआई के मुताबिक दत्ता ने अदालत को बताया कि कूचबिहार के पुलिस अधीक्षक ने शुक्रवार से भाजपा अध्यक्ष की प्रस्तावित रथ यात्रा को अनुमति देने से इंकार कर दिया है.

दत्ता ने कहा कि जिले में सांप्रदायिक मुद्दों का एक इतिहास रहा है और वहां से ऐसी सूचना है कि सांप्रदायिकता को उकसाने वाले कुछ लोग और उपद्रवी तत्व वहां सक्रिय हैं. इस मामले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) द्वारा अनुमति देने से इंकार करने संबंधी पत्र में उल्लेख किया गया है कि भाजपा के कई शीर्ष नेताओं के साथ-साथ अन्य राज्यों से भी लोग कूचबिहार आएंगे. पत्र के मुताबिक इससे जिले की सांप्रदायिक संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है.

उधर, भाजपा ने न्यायमूर्ति तपब्रत चक्रवर्ती की पीठ को बताया कि वह शांतिपूर्ण यात्रा करेगी. इस पर न्यायाधीश ने पूछा कि अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. जवाब में भाजपा के वकील अनिंद्य मित्रा ने कहा कि पार्टी एक शांतिपूर्ण रैली आयोजित करेगी लेकिन, कानून-व्यवस्था को बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. मित्रा ने कहा कि संविधान राजनीति कार्यक्रम आयोजित करने के अधिकार की गारंटी देता है. उन्होंने कहा कि अप्रिय स्थिति की धारणा के आधार पर रैली की अनुमति देने से इंकार नहीं किया जा सकता.

गौरतलब है कि भाजपा का सात दिसंबर से कूचबिहार से अभियान शुरू करने का कार्यक्रम है. इसके बाद नौ दिसंबर को दक्षिण 24 परगना जिला और 14 दिसंबर को बीरभूमि जिले में तारापीठ मंदिर से भाजपा का रथ यात्रा शुरू करने का कार्यक्रम है.