पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और वहां की सेना ने उम्मीद जताई है कि भारत करतारपुर सीमा खोलने की उनकी सद्भावनापूर्ण पहल पर सकारात्मक जवाब देगा.

पीटीआई के मुताबिक गुरूवार को अपने मंत्रिमंडल को संबोधित करते हुए इमरान खान ने कहा, ‘करतारपुर सीमा को खोलना सिखों के लिए वैसा ही है जैसे मदीना हम मुस्लिमों के लिए है. इसीलिए सिख समुदाय ने हमारी पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है. हमें उम्मीद है कि भारत सरकार भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देगी.’

हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने भारतीय मीडिया द्वारा करतारपुर सीमा खोलने की पहल को राजनीतिक रंग दिए जाने को दुर्भाग्य बताया है.

कैबिनेट की बैठक में इमरान खान का कहना था, ‘दुर्भाग्यपूर्ण रूप से भारतीय मीडिया ने करतारपुर को राजनीतिक रंग दे दिया है. लेकिन, यह बिलकुल भी सच नहीं है. हमने ऐसा इसलिए किया क्योंकि यह सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के घोषणापत्र में शामिल था.’

गुरूवार को ही पाकिस्तान के रावलपिंडी में एक अलग संवाददाता सम्मेलन में सेना ने भी भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया की उम्मीद जताई. पाक सेना के मीडिया विभाग के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा कि पाकिस्तान ने भारत के साथ शांति के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए हैं और इस कड़ी में सबसे ताजा कदम करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखना है.

गफूर के मुताबिक उन्हें खेद है कि इस पहल को भारत में नकारात्मक रूप से पेश किया गया, लेकिन फिर भी पाक सेना भारत से पाकिस्तान के इस कदम पर सकारात्मक जवाब मिलने की उम्मीद करती है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीते 28 नवंबर को पाकिस्तान में करतारपुर कॉरिडोर की नींव रखी थी जबकि 26 नवंबर को उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने गुरदासपुर में इसकी नींव रखी थी.

इस गलियारे के जरिए भारतीय सिख श्रद्धालु बिना वीजा के करतारपुर साहिब जा सकेंगे. उन्हें वहां जाने के लिए सिर्फ परमिट लेने की जरूरत होगी. सन् 1522 में गुरु नानक देव ने करतारपुर साहिब की स्थापना की थी.