उत्तर प्रदेश के बहराइच से भाजपा की सांसद सावित्री बाई फुले ने गुरुवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इस खबर को आज के कई अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. उन्होंने भाजपा द्वारा ‘समाज को बांटने के प्रयास’ को अपने इस्तीफे की वजह बताया है. इससे पहले सावित्री बाई फुले का रुख पार्टी की नीतियों के विरोध में दिख चुका है. पिछले दिनों उन्होंने राम मंदिर मुद्दे को तीन फीसदी ब्राह्मणों की ‘कमाई का धंधा’ तक कह दिया था. वे अपनी ही सरकार पर आरक्षण खत्म करने की साजिश करने का आरोप भी लगा चुकी हैं.

आने वाले दिनों में आधार कार्ड छोड़ने का विकल्प

आने वाले दिनों में आधार कार्ड धारक इससे छुटकारा पा सकते हैं. यानी आधार से नाम हटवाने के बाद संबंधित डेटा भी हमेशा के लिए डिलीट कर दिया जाएगा. नवभारत टाइम्स ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कहा है कि केंद्र सरकार आधार कानून में संशोधन को आखिरी रूप देने के अंतिम चरण में है. बताया जाता है कि इस संशोधन के बाद सभी नागरिकों को बायोमेट्रिक्स और डेटा समेत अपना आधार नंबर वापस लेने का विकल्प दिया जाएगा. हालांकि, इसका फायदा केवल उन लोगों को ही पहुंच पाएगा, जिनके पास पैन नहीं है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पैन के साथ आधार लिंक करने को बरकरार रखा था.

पार्टी का हित-अहित सोचे बिना किसी भी मामले की पैरवी करने वाले वकील नेताओं पर कांग्रेस की लगाम

किसी भी मामले की पैरवी करने के लिए तैयार होने वाले वकील नेताओं पर कांग्रेस लगाम कसने की तैयारी में है. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करने वाले वकीलों को पहले ही चेतावनी जारी कर दी है कि वे पार्टी के हित-अहित पर भी विचार करें. बताया जाता है कि अब पार्टी ने गैरनामी वकीलों पर भी शिकंचा कसने की जिम्मेदारी विधि विभाग को दी है. हालांकि पार्टी के इस फैसले पर नामी वकील नेताओं ने विरोध भी किया था. लेकिन, पार्टी नेतृत्व ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए उनसे राजनीतिक पद छोड़ने के लिए कह दिया था.

एनपीएस में सरकार ने अपना योगदान 10 से 14 फीसदी करने का फैसला किया

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का ऐलान किया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक गुरुवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एनपीएस में सरकार की हिस्सेदारी मूल वेतन के 10 से बढ़ाकर 14 फीसदी करने का फैसला लिया है. हालांकि, इसके लाभार्थी कर्मचारी को पहले की तरह 10 फीसदी का ही योगदान करना होगा. अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि यदि कर्मचारी सेवानिवृति के समय एनपीएस में जमा धन का कोई भी हिस्सा निकालने का निर्णय नहीं करता तो उसकी पेंशन अंतिम बार हासिल वेतन के 50 फीसदी से अधिक होगा. इन फैसलों को एक अप्रैल, 2019 से लागू करने की बात कही गई है.