सिद्धू जी, आप इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में गए तो इतना बवाल मचा, लेकिन बीते महीने आप फिर उनके न्यौते पर पाकिस्तान चले गए?

पहले बोलो, बाबे दी द्वार की जय, करतारपुर साहिब की जय. और अब सुनो जवाब. क्रिकेट के दिनों में भी जब-जब मुझे बॉलिंग स्पिन मिली, मैंने गेंद को सीमा रेखा से बाहर भेजे बिना छोड़ा नहीं. तो फिर सियासी विकेट पर ऐसी गेंद कैसे छोड़ सकता हूं! करतारपुर गलियारे की पिच पर मुझे मौका मिला नहीं कि मैं गया सीमा पार, बाबे के द्वार. पंजाब की सियासत में अच्छा स्कोर भी बनाना है भाई. बाकी बवाल को मैं अपने गगनचुंबी शॉट्स पर पब्लिक का शोर-शराबा समझ लेता हूं. खटैक.

लेकिन कहा जा रहा है कि करतारपुर गलियारे से संबंधित कार्यक्रम में पाकिस्तान जाने के लिए आपने अपने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भी इजाजत नहीं ली थी.

ओय सुनो, मोहतरम. सिपाही कैप्टन के ऑर्डर पर जंग में कूद तो जाता है, लेकिन हर गोली कैप्टन से पूछकर नहीं चलाता. मैं तो खिलाड़ी हूं. कैप्टन मेरी बैटिंग का नंबर तय कर सकता है, लेकिन कौन सी गेंद मैं डक करूंगा और किस गेंद पर बॉउंड्री मारूंगा, इसका फैसला तो ये बंदा खुद करेगा. अगर कैप्टन की इजाजत का इंतजार करेगा तो गिल्लियां बिखर जाएंगी. ठोको ताली (ठहाका).

आपने पहले कहा कि आप राहुल गांधी की इजाजत से पाकिस्तान गए थे, लेकिन बाद में अपनी बात से पलट गए और कहा कि आप अपने दोस्त इमरान के बुलावे पर गए. ऐसा क्यों?

यही तो ऊपरी क्रम के सियासतदां की खासयित है. मेरे ऊपर सवाल उठे तो मैंने राहुल जी वाली पंचलाइन मार दी. लेकिन जब टाइमिंग गड़बड़ाई तो मैंने बॉल फिर अपने दोस्त इमरान की ओर उछाल दी, और इमरान भाई स्विंग के माहिर, पूरा मामला रिवर्स स्विंग हो गया.

तब आपने यह भी कहा था, मेरे कैप्टन राहुल गांधी हैं… क्या आप अमरिंदर सिंह को अपना कैप्टन नहीं मानते?

सच्ची गल करूं तो मैं अपना कैप्टन किसी को नहीं मानता. मैं ऐसा खिलाड़ी हूं जो बिना कप्तान खेलने में ज्यादा चंगा महसूस करता है. याद करो, अज़हर भाई की कप्तानी में एक बार मैंने कैसे अपना बैट-बल्ला समेटा और आधे दौरे से ही लौट आया था. बाकी, ये जो अमरिंदर जी वाला कंफ्यूजन यूं हुआ कि मैंने समझा कि नेशनल टीम की बात हो रही है तो राहुल गांधी का नाम ले लिया. मुझे पता होता कि ये रणजी लेवल की सियासत की बात है तो मैं कैप्टन अमरिंदर का नाम ले लेता. अपन तो दोनों टीम से खेलते हैं. और भाई बाद में कह तो दिया अमरिंदर जी को पितातुल्य. अब, मिट्टी पाओ यार इस मसले पर.

लेकिन पंजाब के कई मंत्रियों का कहना है कि अगर आप मुख्यमंत्री को अपना कैप्टन नहीं मानते तो उनकी टीम छोड़ क्यों नहीं देते?

सुनो गुरु, ‘बंदरों की घुड़क, स्यार की बोलियां/सिंह निर्माण करते नहीं टोलियां.’ जो लोग ये बात कर रहे हैं वे 12वें खिलाड़ी हैं और अंतिम 11 में आने की कोशिश कर रहे हैं. और मैं जो कर रहा हूं वो टीम छोड़ने के लिए नहीं खुद टीम का कैप्टन बनने के लिए और ‘कैप्टन’ को कोच बनाने के लिए कर रहा हूं.

लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने भी आपको नसीहत दी है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ही आपके बॉस हैं.

सियासत में आलाकमान और खेल में अंपायर होते ही नसीहत देने के लिए हैं जनाब. लेकिन उनकी नसीहत न खिलाड़ी सुनते हैं और न सियासतदां. मैं तो दोनों हूं. मैं कैप्टन की इच्छा के बगैर उनकी टीम में खेल रहा हूं और कैप्टन मेरी इच्छा के बगैर मेरी फील्डिंग लगाना चाह रहे हैं. तो ऐसे में आलाकमान के पास नसीहत के अलावा क्या बचता है! वैसे भी मेरी शायरी और आलाकमान की नसीहत दोनों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए.

वहीं दूसरी तरफ भाजपा के लोग आप पर पाकिस्तानपरस्ती का आरोप लगा रहे हैं.

अजी छोड़ो भी. मैं संजीदा सियासी बातचीत के मूड में हूं. और आपने लॉफ्टर चैलेंज वाला सवाल कर दिया. वो तो यूनिवर्सिटी के उन लड़कों को भी पाकिस्तानपरस्त बता देते हैं जो सिर्फ हॉस्टल से क्लास और क्लास से हॉस्टल जाते हैं. मैं तो फिर भी बाघा पार कर करतारपुर तक चला गया था.

पाकिस्तान में खालिस्तान समर्थक गोपाल चावला के साथ आपकी तस्वीर...

मैं पुराना चावल हूं और क्रिकेट, टीवी शो से लेकर राजनीति तक में पका हूं. आप इस चावल को किसी चावला का नाम लेकर नहीं फंसा सकते. अगला सवाल ठोको.

सुषमा स्वराज जी का कहना है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री का यह बयान कि भारत इमरान खान की गुगली में फंस गया, पाकिस्तानी सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है.

अरे भाई, ये सियासी लोग न जाने क्यों क्रिकेट की जबान में बात करते हैं. क्रिकेट के बारे में न पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुछ जानते हैं और न हमारी विदेश मंत्री सुषमा जी. देखिए, इमरान फ़ास्ट बॉलर है. उसे डालनी होगी तो यॉर्कर डालेगा, स्पिन बॉलर की तरह गुगली थोड़ी डालेगा. और हां, अगर इमरान भाई के पास यॉर्कर है तो शेरी के पास भी कवर ड्राइव है.

सिद्धू जी, क्या ऐसा नहीं लगता कि आपकी और इमरान खान की दोस्ती कुछ ज्यादा परवान चढ़ रही है?

अरे भाई! जब एक बंदा इस्लामाबाद से करतारपुर तक का लंब रन-अप ले रहा है तो हमारा भी तो फर्ज बनता है कि क्रीज छोड़कर कम से कम अमृतसर के कुछ आगे तक तो निकलें. अब इस क्रिकेट डिप्लोमेसी पर ठोको ताली.

सिद्धू जी, आखिरी सवाल....

ओ भाई अब छड़ दे. विधानसभा चुनाव प्रचार में भाजपाइयों की बोलती बंद करते करते मेरी खुद की आवाज बंद हो रही है. आवाज सही होने दो फिर सारे सवालों के जवाब दूंगा. तब तक मेरे खटैक से काम चलाओ बादशाहो. ठोको ताली (बैठे हुए गले से).