अफगानिस्तान में तालिबान के हमलों में सैनिकों का मारा जाना जारी है. गुरुवार देर रात यहां के हेरात प्रांत में तालिबान के एक और हमले में 14 अफगान सैनिक मारे गए. हालांकि रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता गफूर अहमद जावीद ने मारे गए और घायल सैनिकों की संख्या कम बताई है. इसके अलावा तालिबान ने 21 सैनिकों को बंधक बना लिया.

पीटीआई की खबर के मुताबिक हेरात प्रांतीय परिषद के सदस्य नजीबुल्ला मोहेबी ने कहा कि हमलावरों ने बीती देर रात निनदांद में सेना की दो बाहरी चौकियों को घेर कर हमला किया. उन्होंने कहा कि करीब छह घंटे तक चली लड़ाई आज सुबह खत्म हुई. इसके बाद वहां पहुंची सैन्यबलों ने विद्रोहियों को खदेड़ दिया, लेकिन तब तक वे 21 सैनिकों को बंधक बना चुके थे. किसी भी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन अधिकारियों ने इसके लिए तालिबान को जिम्मेदार ठहराया है.

तालिबान का यह ताजा हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका उससे बातचीत करने के प्रयास कर रहा है. हालांकि पाकिस्तान के एक पूर्व शीर्ष राजनयिक ने इस संबंध में अमेरिका को आगाह किया है. पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक के मुताबिक तालिबान इस बातचीत के जरिए धोखा देकर अमेरिका को अफगानिस्तान से बाहर कर सकता है, जिससे अफगानिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय आतकंवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन सकता है.

खबर के मुताबिक अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने विदेश नीति से जुड़ी एक प्रतिष्ठित पत्रिका में लिखा, ‘अगर अमेरिका जल्दबाजी में अफगानिस्तान छोड़ने का फैसला करता है तो जिहादी पूरी दुनिया में भविष्य के लड़ाकों को यह बताएंगे कि किस तरह उनके धार्मिक जुनून के साथ आतंकवाद के मिश्रण ने दुनिया की दो सैन्य महाशक्तियों पर जीत हासिल की.’