उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि देश में विदेशियों को तो बेहतर इलाज की सुविधा मिल जाती है, लेकिन विडंबना है कि अपने नागरिकों को यह सुविधा नहीं मिलती. उपराष्ट्रपति ने गुरुवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के दीक्षांत समारोह के दौरान चिकित्सा पर्यटन के प्रसार की सराहना करते हुए यह बात कही.

पीटीआई के मुताबिक समारोह को संबोधित करते हुए वेंकैया नायडू ने उम्मीद जताई कि प्रत्येक नागरिक को बेहतर दायित्वबोध के साथ चिकित्सा सुविधा मिले. उन्होंने कहा ‘हमारी चिकित्सा सेवाओं की यह विडंबना ही है कि एक तरफ भारत में दूसरे देशों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों के कारण चिकित्सा पर्यटन तेजी से बढ़ा है, हालांकि इलाज की वैसी सुविधाएं अनेकों भारतीयों की पहुंच से दूर हैं. हमें इस स्थिति से बाहर आना होगा. हमें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं विकसित करनी होंगी.’

नायडू ने युवा डॉक्टरों से चिकित्सा सेवा के नैतिक मूल्यों को सदैव ध्यान में रखने का आह्वान करते हुए कहा कि वे प्रत्येक मरीज की आर्थिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखे बिना पूरी शिद्दत से उसका इलाज करें. उपराष्ट्रपति ने देश में ही विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीक और उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि इससे न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि उपकरणों की कीमत भी कम होगी. संबोधन में उपराष्ट्रपति ने चिकित्सा सेवाओं के मामले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच व्याप्त अंतर का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित कर इस अंतर को खत्म किया जा सकता है.