उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भगवान हनुमान को दलित कहे जाने को लेकर राजनीति जारी है. उनके इस बयान के बाद बीते दिनों उत्तर प्रदेश के आगरा में दलितों ने हनुमान के एक मं​दिर पर कब्जा भी कर लिया था. एनडीटीवी के मुताबिक अब वाराणसी में प्र​गतिशील समाजवादी पार्टी (पीएसपी) की युवजन सभा ने हनुमान का जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने की मांग की है. इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय में आवेदन भी किया है.

दिलचस्प बात यह है कि इस फॉर्म में हनुमान से जुड़ी तमाम जानकारियां भी दी गई हैं. मसलन इसमें उनके पिता का नाम महाराज केशरी व माता का नाम अंजनी देवी लिखा गया है. साथ ही उनका स्थायी पता जहां वाराणसी का संकट मोचन मंदिर लिखा गया है तो वहीं जाति प्रमााण पत्र हासिल करने की वजह को हनुमान के लिए आरक्षण का लाभ प्राप्त करना बताया गया है.

भगवान हनुमान की जाति प्रमाण पत्र के लिए भरा गया फॉर्म
भगवान हनुमान की जाति प्रमाण पत्र के लिए भरा गया फॉर्म

पीएसपी युवजन सभा के जिला अध्यक्ष हरीश मिश्रा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तरफ से जिस तरह देवताओं को राजनीति में घसीटा जा रहा है उसके विरोधस्वरूप यह कदम उठाया गया है. उनके मुताबिक भाजपा पहले से ही भगवान राम को लेकर राजनीति कर रही है और अब उसने हनुमान को भी इसमें शामिल कर लिया है. उन्होंने आगे कहा कि अगर हनुमान दलित हैं तो योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार को उनका जाति प्रमाण पत्र जारी करना चाहिए.

इससे पहले बीते महीने राजस्थान के अलवर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ‘बजरंगबली ऐसे देवता हैं जो स्वयं वनवासी, निर्वासी, दलित, वंचित हैं. बजरंगबली भारतीय समुदाय को उत्तर से लेकर दक्षिण, पूरब से लेकर पश्चिम तक सबको जोड़ने का काम करते हैं.’ इस बयान के बाद वे विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए थे.

उधर, उनके उस बयान के बाद अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साय ने हनुमान के दलित के बजाय अनुसूचित जनजाति से संबंधित होने की बात कही थी. उनका तर्क था कि जनजातियों में हनुमान एक गोत्र होता है इसलिए हनुमान को जनजाति वर्ग का माना जाना चाहिए. इसके बाद मानव संसाधन राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने हनुमान को आर्य बताया था. उनका कहना था कि भगवान राम और हनुमान के युग में जाति व्यवस्था नहीं थी इसलिए हनुमान जी आर्य थे.