सर्जिकल स्ट्राइक का अहम हिस्सा रहे लेफ्टेनेंट जनरल (सेवानिवृत) डीएस हुड्डा ने कहा कि भारत में इसका जरूरत से ज्यादा शोर और राजनीतिकरण किया गया. समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए डीएस हुड्डा ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक का जरूरत से ज्यादा प्रचार ओर राजनीतिकरण किया गया… लेकिन सेना की दृष्टि से देखा जाए तो स्ट्राइक की काफी जरूरत थी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने उड़ी हमले में काफी सैनिकों को खोया. ये बहुत जरूरी था कि पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जाए. हम पाकिस्तान को बताना चाहते थे कि यदि वे हमारे इलाके में आकर ऐसे हमले करेंगे तो हम भी उनके इलाके में घुसकर इसे बड़े और बेहतर हमले कर सकते हैं.’

पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवादी संगठनों ने 18 सितंबर, 2016 को सेना के उड़ी स्थित कैं पर हमला किया था जिसमें भारत के 20 सैनिक मारे गए थे. हमले के दस दिन बाद 28 और 29 सितंबर की रात को भारतीय सेना ने सीमा पार सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए आतंकवादी संगठनों के चार लॉन्च पैड्स को तबाह कर दिया था. इस साल सर्जिकल स्ट्राइक के दो साल पूरे होने पर केंद्र सरकार ने इसके वीडियो भी सार्वजनिक किए गए थे. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी कई मौकों पर इसका श्रेय लेती रहती है.