गोवा के मुख्य सचिव धर्मेंद्र शर्मा ने राज्य के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की स्वास्थ्य रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने को निजता के अधिकार का उल्लंघन बताया है. बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक उन्होंने यह बात बॉम्बे हाईकोर्ट की पणजी खंडपीठ के समक्ष दाखिल एक हलफनामे में कही है. इस हलफनामे में उहोंने लिखा है, ‘किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को सार्वजनिक करने में कोई जनहित नहीं हो सकता. अगर आज मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य की जानकारी को सार्वजनिक करने वाली याचिका को स्वीकार किया जाता है तो भविष्य में बड़े पदों पर बैठे लोगों की मेडिकल रिपोर्ट की मांग शुरू हो जाएगी. तब स्वास्थ्य संबंधी किन जान​कारियों को जनहित के नाम पर सार्वजनिक किया जाए और किसे नहीं इसमें महीन फर्क करना बेहद कठिन हो जाएगा.’

गोवा के मुख्य सचिव ने आगे लिखा है, ‘किसी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजानिक किए जाने का निर्णय उस व्यक्ति अथवा उसके परिवार पर निर्भर करता है. मैं समझता हूं किसी की निजी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए और न ही किसी पर अपनी स्वास्थ्य रिपोर्ट सार्वजनिक करने के लिए दबाव ही बनाया जाना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक करने को लेकर दबाव बनाया जाता है भले ही वह मुख्यमंत्री ही क्यों न हो तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन होगा.’

इसके साथ ही धर्मेंद्र शर्मा ने गोवा के विपक्षी दलों के उन दावों को भी गलत बताया है जिनमें कहा जा रहा था कि राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री के फर्जी दस्तखत का इस्तेमाल कर रही है. धर्मेंद्र शर्मा के मुताबिक मनोहर पर्रिकर के अस्वस्थ होने के बावजूद राज्य की प्रशासनिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा है. साथ ही संबंधित जरूरी कामों को मुख्यमंत्री अपने निजी आवास से निपटा रहे हैं. इसके अलावा उन्होंने हाल में राज्य के उच्च अधिकारियों, पार्टी विधायकों और मंत्रियों के साथ बैठकें भी की हैं.

इससे पहले कांग्रेस के नेता ट्राजनो डिमेलो ने मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य का हाल जानने को लेकर हाईकोर्ट की इसी खंडपीठ के समक्ष एक याचिका दाखिल की थी. इसी याचिका के मद्देनजर हाईकोर्ट ने धर्मेंद्र शर्मा को मनोहर पर्रिकर के स्वास्थ्य का विवरण देने वाला एक हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था और 11 दिसंबर तक के लिए मामले की सुनवाई टाल दी थी. इस दौरान कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि सत्ताधारी पार्टी के पास कोई दूसरा चेहरा न होने से वह अस्वस्थता के बावजूद मनोहर पर्रिकर को मुख्यमंत्री पद पर बनाए हुए है.