जीडीपी आंकडों में फेरबदल को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच चल रहे विवाद के बीच नरेंद्र मोदी सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने जीडीपी गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं. अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा है कि जीडीपी की गणना विशेषज्ञ ही करें तो अच्छा है, नहीं तो इसको लेकर संदेह पैदा ही होगा. आंकड़ो में नीति आयोग के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिनके पास सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) गणना की विशेषज्ञता नहीं है, उनको इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाना चाहिए.

पीटीआई के साथ बातचीत में अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा, ‘एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा मानना है कि जीडीपी श्रृंखला की संशोधित पिछली कड़ियों में कुछ ‘पहेली’ जरुर है, जिन्हें स्पष्ट किया ही जाना चाहिए.’ उनके मुताबिक बहुत सारी चीजें साफ नहीं हैं, ऐसे में भरोसा कायम करने और संदेह को दूर करने के लिए विशेषज्ञों को इसकी गहन जांच करनी चाहिए.

केन्द्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) ने पिछले महीने 2004-05 के बजाय 2011-12 के आधार वर्ष का इस्तेमाल करते हुए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय के जीडीपी आंकड़ों को घटा दिया था. इसे लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच वाक-युद्ध चला था. इस गणना में नीति आयोग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे.

अरविंद सुब्रमण्यम ने हाल में अपनी नई किताब ‘आफ काउंसिल: द चैलेंजेस आफ द मोदी जेटली इकनॉमी’ में नोटबंदी पर सवाल खड़े किए थे. यह पूछे जाने पर कि जब वह सरकार के साथ काम कर रहे थे तो उन्होंने नोटबंदी पर कुछ नहीं कहा और अब वह इस मुद्दे को अपनी किताब बेचने के लिए उठा रहे हैं, इस पर सुब्रमण्यम ने कहा कि लोगों को जो कहना है वे कहें.