ब्रिटेन में ब्रेक्जिट के मसले पर राजनीतिक उथल-पुथल रुकने का नाम नहीं ले रही है. प्रधानमंत्री टेरेसा मे के कई मंत्रियों के इस्तीफे के बाद अब उनकी कुर्सी पर भी संकट मंडराता दिख रहा है.

पीटीआई के मुताबिक टेरेसा मे के खिलाफ बुधवार रात को अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है. बुधवार को ही इस प्रस्ताव पर गुप्त मतदान होगा और इसके कुछ देर बाद ही नतीजे की भी घोषणा कर दी जायेगी. यानी कुछ घंटों बाद यह तय हो जाएगा कि टेरेसा मे ब्रिटेन की प्रधानमंत्री रहेंगी या नहीं.

यूरोपीय संघ से ब्रेक्जिट को लेकर समझौता कर चुकीं टेरेसा मे की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि उनकी अपनी पार्टी में ही इसका काफी विरोध हो रहा है. उनकी पार्टी के सांसदों का एक धड़ा इस ब्रेक्जिट समझौते के पूरी तरह खिलाफ है. यह धड़ा ही उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रहा है.

नियम के अनुसार अगर सत्ताधारी पार्टी के 15 फीसदी सांसद अविश्वास प्रस्ताव के लिए अपील करते हैं तो इस पर संसद को मतदान कराना होगा. सत्ताधारी कंजरवेटिव पार्टी के इस समय 315 सांसद हैं जिनमें से पिछले दिनों 48 सांसदों ने संसद को अविश्वास प्रस्ताव के लिए पत्र लिखा था. अविश्वास प्रस्ताव पर होने वाले मतदान में केवल सत्तधारी पार्टी के सांसद ही शामिल हो सकते हैं.

बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद प्रधानमंत्री टेरेसा मे ने मीडिया को एक बयान जारी कर कहा, ‘मैं ब्रिटेन को यूरोपीय संघ से अलग करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए दृढ़ हूं. मेरे पास जो कुछ है, मैं उससे आज इस अविश्वास प्रस्ताव का सामना करूंगी.’

खबरों के मुताबिक टेरेसा मे को विश्वास मत हासिल करने के लिए 158 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी, लेकिन अगर वे यह बाधा पार नहीं कर पातीं हैं तो उनकी पार्टी को किसी अन्य नेता को देश का प्रधानमंत्री चुनना होगा.

इससे पहले बीते सोमवार को टेरेसा मे ने यूरोपीय संघ से किए गए ब्रेक्जिट समझौते पर होने वाले संसदीय मतदान को टाल दिया था. यह मतदान ब्रिटेन की संसद में मंगलवार 11 दिसंबर को होना था.

इस दौरान मे ने संसद को संबोधित करते हुए कहा था, ‘मेरे द्वारा की गई ब्रेक्जिट डील के कई पहलुओं को व्यापक समर्थन मिल रहा है, लेकिन ‘बैकस्टॉप’ मुद्दे का विरोध किया जा रहा है. ऐसे में अगर अभी मतदान हुआ तो हम बड़े अंतर से हार सकते हैं, इसलिए इसे आगे बढ़ाना जरूरी है.’ उनका ये भी कहना था कि बैकस्टॉप के मुद्दे पर वे यूरोपीय संघ के अधिकारियों से फिर बात करेंगी और उन्हें मनाने का प्रयास करेंगी. बैकस्टॉप का मतलब है कि उत्तरी आयरलैंड के सीमाई क्षेत्र पर ब्रेक्जिट के बाद भी यूरोपीय संघ के नियम प्रभावी रहेंगे. कई सांसदों का कहना है कि यह सही नहीं है क्योंकि ऐसे में ब्रेक्जिट के बाद भी इन क्षेत्रों को यूरोपीय संघ के नियमों का ही पालन करना पड़ेगा.

खबरों के मुताबिक टेरेसा को मतदान इसलिए टालना पड़ा क्योंकि उनकी तमाम कोशिशों के बावजूद वे अपने ही करीब 100 सांसदों को ब्रेक्जिट समझौते के पक्ष में मतदान करने के लिए नहीं मना पाई थीं. मे इस समझौते पर कई हफ्तों से इन सांसदों को रजामंद करने में जुटी हुई थीं.

प्रधानमंत्री टेरेसा मे को अपनी सरकार और यूरोपीय संघ के बीच पिछले महीने हुए ब्रेक्जिट समझौते पर संसद की मंजूरी पाना जरूरी है और यह काम उन्हें 21 जनवरी तक हर हाल में करना है क्योंकि ब्रिटिश सरकार को 29 मार्च से पहले ब्रेक्जिट डील से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करनी हैं.