‘भाजपा की गलत नीतियों से दुखी जनता ने दिल पर पत्थर रखकर कांग्रेस को समर्थन दिया है.’  

— मायावती, बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो

मायावती का यह बयान राज्य विधानसभा चुनावों के नतीजों पर आया है. उन्होंने यह भी कहा है, ‘मुझे जानकारी मिली थी कि मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जोड़-तोड़ करके अपनी सरकार बनाने की कोशिश में लगी हुई है. इसीलिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने कांग्रेस की नीतियों और सोच से असहमत होने के बावजूद उसे समर्थन देने का फैसला किया.’ मायावती ने यह भी कहा कि भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस को समर्थन दिया जा सकता है. हालांकि इन दोनों पार्टियों के शासन में कमजोर तबके का शोषण ही होता है.

‘जनता के बारे में कोई भी किसी तरह की भविष्यवाणी नहीं कर सकता.’  

— सुब्रमण्यम स्वामी, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद

सुब्रमण्यम स्वामी ने यह बात विधानसभा चुनाव के नतीजों को देखते हुए अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कही है. उन्होंने आगे कहा कि भाजपा ने खुद को जनता का ‘ठेकेदार’ समझ लिया था जो पूरी तरह से गलत साबित हो चुका है. इसलिए पार्टी को अब ‘जाग जाना’ चाहिए. सुब्रमण्यम स्वामी के मुताबिक, ‘देश की भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी ऐसी ही गलती की थी और उन्हें भी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.’


‘मध्य प्रदेश में चौकीदारी की जिम्मेदारी अब हमारी होगी.’  

— शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री

शिवराज सिंह का यह बयान मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव में भाजपा को मिली हार पर आया है. उन्होंने कहा कि भाजपा के पास अब भी 109 विधायक हैं और ऐसे में पार्टी मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाते हुए प्रदेश के विकास में रचनात्मक सहयोग करेगी. इसके साथ ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व का बचाव करते हुए उन्होंने चुनाव में मिली हार के लिए खुद को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, ‘केंद्र और राज्य सरकार, दोनों ने राज्य के लोगों के हित में अनेक योजनाएं लागू की थीं. फिर भी यदि हम हार गए तो कहीं न कहीं दोष मेरा ही था. शायद मुझ से ही कुछ कमी रह गई थी.’


‘नीतीश कुमार पलटी मारने की सोच रहे हैं!’  

— तेजस्वी यादव, राष्ट्रीय जनता दल के नेता

तेजस्वी यादव ने यह बात राज्य विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तंज कसते हुए कही है. तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए एक ट्वीट में लिखा है, ‘बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने की क्षमता इस देश में किसी की नहीं है. मैं विनम्रता के साथ नीतीश जी से पूछना चाहता हूं कि अब (विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद) इस बारे में उनका क्या विचार है?’ इसके साथ ही उन्होंने आगे लिखा है, ‘नीतीश जी अब एक बार फिर ‘महागठबंधन’ के साथ जुड़ने पर विचार कर रहे होंगे.’


‘जब पार्टी हाईकमान को ही फैसला करना था तो ​फिर विधायकों से राय क्यों ली जा रही है?’  

— विश्वेंद्र सिंह, कांग्रेस के नेता

विश्वेंद्र सिंह ने यह बात अपनी ही पार्टी के नेताओं के एक फैसले पर असहमति जताते हुए कही है. विश्वेंद्र सिंह के मुताबिक, ‘राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला अगर पार्टी हाईकमान को ही करना था तो व्यक्तिगत स्तर पर विधायकों की राय लेने का कोई मतलब नहीं है.’ इसके साथ ही उन्होंने सवालिया लहजे में यह भी कहा, ‘जब मेरी राय का कोई मतलब ही नहीं तो मुख्यमंत्री का नाम सुझाने के लिए मैं पार्टी पर्यवेक्षकों के साथ समय क्यों बर्बाद करूं.’