आधार अब मतदाता पहचान पत्र के साथ भी जोड़ा जा सकता है. द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) इसकी तैयारी कर रहा है. सूत्राें ने अख़बार को बताया है कि आयोग जिस तरह की तैयारी कर रहा है उसे देखकर लगता है कि आधार का मतदाता पहचान पत्र से जाेड़ना स्वैच्छिक नहीं बल्कि अनिवार्य हो सकता है. वह भी कानूनी तौर पर.

सूत्राें की मानें ताे ईसीआई जल्द ही केंद्र सरकार के कानून मंत्रालय से जनप्रतिनिधित्व कानून-1951 में बदलाव की सिफ़ारिश कर सकता है. इस संशोधन के बाद 12 अंकों वाले आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ना अनिवार्य किया जा सकता है. हालांकि इस प्रक्रिया में यह पुख़्ता व्यवस्था की जाएगी कि मतदाताओं की निजी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित रहें. बताया जाता है कि यह इंतज़ाम इसलिए किया जा रहा है ताकि मतदाता सूचियां ज़्यादा सटीक हो सकें.

इस प्रक्रिया से जुड़े एक अफ़सर के मुताबिक आयोग ने इस बाबत 26 सितंबर को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भी विचार किया है. साथ ही आधार का काम देखने वाली संस्था- यूआईडीएआई (यूनीक़ आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) से भी मशविरा किया है. उसने माना है कि अगर आधार को मतदाता पहचान पत्र से जाेड़ने के बाबत कानूनी इंतज़ाम हो जाएं तो यह संभव है. इसी के बाद आयोग ने कानून मंत्रालय को सिफ़ारिश भेजने का फ़ैसला किया है.

यहां दो बातें और ध्यान रखने की हैं. पहली ये कि सुप्रीम कोर्ट ने इस साल सितंबर में जो आदेश दिया था उसमें आधार बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन संबंधी सेवाओं से जोड़ने पर रोक लगा दी थी. हालांकि स्थायी खाता संख्या (पैन) आदि से उसे जोड़ने को हरी झंडी भी दी थी. इसके अलावा दूसरी बात ये कि मतदाता सूचियों में फ़र्ज़ी मतदाताओं (एक से ज़्यादा जगहों पर दर्ज़ नाम आदि) की समस्या अक़्सर आयोग के सामने आती है. चुनावी मौसम में सभी राजनीतिक दल इस पर चिंता जताते हैं. इसे देखते हुए आयोग काे लगता है कि आधार से मतदाता पहचान पत्रों को जोड़ने से इस समस्या पर लगाम लगेगी.