मेघालय हाईकोर्ट के बीते सोमवार को केंद्र सरकार को ऐसा कानून लाने की सिफारिश की जिससे पड़ोसी देशों- पाकिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले गैर-मुस्लिम नागरिकों को बिना दस्तावेज के भारतीय नागरिता मिल सके. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एसआर सेन ने अपने फैसले में यह भी लिखा है, ‘भारत को विभाजन के बाद हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए था लेकिन ये धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बना रहा.’

मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस एसआर सेन ने यह टिप्पणी अमन राना की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने फैसले में की है. अमन राना को मेघालय सरकार ने राज्य की नागरिकता देने से इंकार कर दिया था. इसके अमन ने हाई कोर्ट का रुख किया था.द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एसआर सेन ने कहा, ‘मैं साफ करना चाहता हूं कि कोई भी भारत को इस्लामिक देश बनाने की कोशिश न करे. अगर यह इस्लामिक देश हो गया तो भारत और दुनिया में कयामत आ जाएगी. मुझे इसका पूरा भरोसा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मामले की गंभीरता को समझेंगे. जरूरी कदम उठाएंगे.’

जस्टिस एसआर सेन ने यह भी कहा, ‘भारत के कानून और संविधान का विरोध करने वाले किसी शख्स को भारत का नागरिक नहीं माना जा सकता. हमें नहीं भूलना चाहिए कि पहले हम भारतीय हैं, फिर अच्छे मनुष्य. जिस समुदाय से हम ताल्लुक रखते हैं, वो उसके बाद आता है.’