ऑस्ट्रेलिया के पर्थ का नया ऑप्टस स्टेडियम टेस्ट क्रिकेट के स्वागत के लिए तैयार है. शुक्रवार को भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच होने वाला मैच इस स्टेडियम का पहला टेस्ट मैच होगा. पर्थ में इससे पहले टेस्ट मैच वाका स्टेडियम में हुआ करते थे जिसकी पिच हमेशा से एशियाई टीमों के लिए बड़ी चुनौती रही है. वाका की तेज और बाउंसी हरी पिच देखकर विपक्षी टीम के बल्लेबाजों की धड़कनें बढ़ जाया करती थीं. हालांकि, पर्थ के ऑप्टस स्टेडियम की पिच को लेकर दो दिन पहले तक कहा जा रहा था कि यह शायद वाका से अलग हो, लेकिन बुधवार को पिच देखने के बाद साफ़ हो गया कि यह वाका से ज्यादा अलग नहीं है.

पिच देखने के बाद सबसे ज्यादा इंतजार भारतीय टीम की प्रतिक्रिया का किया जा रहा था क्योंकि इससे पहले के ऑस्ट्रेलिया दौरों पर ऐसी पिचें टीम इंडिया का सिरदर्द बनती रही हैं. वर्तमान दौरे से पहले तक बीते 71 सालों में ऑस्ट्रेलिया में केवल पांच टेस्ट ही जीत पाने की सबसे बड़ी वजह वहां की तेज पिचों को ही माना जाता है. बहरहाल, इसके बाद बुधवार रात सबसे पहले भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच भरत अरुण मीडिया से मुखातिब हुए. तेज पिच के बारे में पूछे जाने पर उनका कहना था, ‘इस पिच को लेकर हम बिलकुल परेशान नहीं हैं. निश्चित तौर पर इस तरह के विकेट पर हमारे गेंदबाजों को भी गेंदबाजी करने में मजा आएगा. हमें कैसी भी पिच मिले उस पर खेलने से हमें खुशी होगी.’

इसके कुछ घंटे बाद भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली ने पिच को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी. यह प्रतिक्रिया ऐसी थी जिसे सुनकर शायद ऑस्ट्रेलियाई टीम की चिंता बढ़ गयी होगी. कोहली ने मैच की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से मुस्कराते हुए कहा, ‘हम हरी जीवंत पिच देखकर परेशान होने के बजाय अधिक उत्साहित हो गए हैं. हम समझते हैं कि हमारे पास ऐसा गेंदबाजी आक्रमण है, जो पूरी विरोधी टीम को किसी भी पिच पर आउट करने की क्षमता रखता है.’ भारतीय कप्तान ने यह तक कह दिया, ‘हम उम्मीद करते हैं कि पिच पर यह घास बरकरार रखी जाए और मैच से कुछ घंटे पहले क्यूरेटर इसे न हटाए...हम एक टीम के तौर पर इसे देखकर बहुत खुश हैं.’

हरी पिच देखकर भारत के खुश होने की वजह भी है

भारतीय टीम मैनेजमेंट और कप्तान दोनों के हरी पिच देखकर खुश होने की वजह केवल और केवल भारतीय गेंदबाजी आक्रमण है. आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले दो सालों में भारतीय टीम ने जो भी मैच जीते हैं उनमें सबसे ज्यादा योगदान भारतीय गेंदबाजों का रहा है. खासकर दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड में, जहां सीरीज हारने के बाद भी भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन ने दुनियाभर के क्रिकेट विशेषज्ञों को चौंका दिया था. दक्षिण अफ्रीका में भारतीय गेंदबाजों ने तीन मैचों में सभी 60 विकेट लिये थे और इंग्लैंड में पांच टेस्ट मैचों में 90 में से 82 विकेट हासिल किये थे. इसके बाद बीते हफ्ते भारतीय गेंदबाजों ने एडीलेड की धीमी पिच पर भी सभी 20 विकेट हासिल कर लिए.

गौर करने वाली बात यह है कि दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड सहित पिछले एक साल में खेली गयी टेस्ट सीरीजों में स्पिनरों से ज्यादा भारतीय तेज गेंदबाज सफल हुए हैं. पिछले दस मैचों में मोहम्मद शमी ने 38 विकेट, ईशांत शर्मा ने नौ मैचों में 33, जसप्रीत बुम्राह ने सात मैचों में 34, उमेश यादव ने चार मैचों में 18 और भुवनेश्वर कुमार ने दो मैचों में 10 विकेट हासिल किए हैं. पर्थ टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कप्तान कोहली कहते भी हैं, ‘मैं भाग्यशाली हूँ कि मैं भारतीय टीम का कप्तान तब बना, जब उसके पास अब तक के सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज हैं.’

कैसे ऑस्ट्रेलिया को हरी पिच का दांव उलटा पड़ सकता है

क्रिकेट के विश्लेषक ऑस्ट्रेलिया द्वारा ऑप्टस की पिच हरी और बाउंसी बनवाने के पीछे दो वजहें बताते हैं. इनके मुताबिक इसकी पहली वजह तेज पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों के कमजोर प्रदर्शन का इतिहास है. दूसरी वजह यह है कि इस समय ऑस्ट्रेलिया के पास केवल गेंदबाजी आक्रमण ही है जिसके दम पर वह मैच जीतने या अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद कर सकता है, इसलिए हरी पिच बनाकर वह अपने तेज गेंदबाजों को इसका पूरा लाभ देने की कोशिश में हैं. लेकिन, कुछ जानकार यह भी कहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया का यह दांव उस पर उलटा पड़ने की आशंका ज्यादा है क्योंकि इस समय उसकी बल्लेबाजी अब तक की सबसे कमजोर बल्लेबाजी है जबकि भारतीय तेज गेंदबाजी अब तक की सबसे मजबूत. ऐसे में भारतीय गेंदबाज उसके बल्लेबाजों पर ज्यादा भारी पड़ सकते हैं.

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन दूसरे टेस्ट की पूर्व संध्या पर फॉक्सस्पोर्ट्स से बातचीत में कहते हैं, ‘मेरा मानना है कि दूसरे टेस्ट के लिये हरियाली पिच बनाने का फैसला आस्ट्रेलिया को उलटा पड़ने वाला है.’ वान आगे कहते हैं, ‘पहले दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड फिर एडीलेड में भारतीय गेंदबाजों को देखने के बाद मैं निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और ईशांत शर्मा मैच से पहली वाली रात यह कहते हुए सोयेंगे कि पर्थ पर ऐसी पिच देने के लिए ऑस्ट्रेलिया का शुक्रिया.’ माइकल वान के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया को ऐसी पिच बनाने से पहले यह सोचना चाहिए था कि इस समय उसके सबसे अच्छे गेंदबाज मिचेल स्टार्क से कहीं अच्छी गेंदबाजी भारतीय तेज गेंदबाज कर रहे हैं.

क्यों पिच का रूख अचानक बदल भी सकता है?

ऑप्टस स्टेडियम की पिच वाका के मुख्य क्यूरेटर ब्रेट सिपथोर्प ने ही तैयार की है. बुधवार को सिपथोर्प ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने वाका की परंपरा को ही आगे बढ़ाते हुए ऑप्टस में भी तेज और उछाल वाली पिच तैयार की है. उनके मुताबिक इस स्थिति में मजबूत तेज गेंदबाजी आक्रमण वाली दोनों ही टीमें पहले गेंदबाजी करना पसंद करेंगी और इसलिए टॉस काफी अहम रोल अदा करेगा.

हालांकि, क्यूरेटर ब्रेट सिपथोर्प एक और बात भी बताते हैं. उनके मुताबिक दोनों टीमों के कप्तानों को पर्थ की गर्मी को भी ध्यान में रखना चाहिए. वे कहते हैं, ‘सभी तेजी, उछाल और मूवमेंट के बारे में बात कर रहे हैं, लेकिन कोई 38 डिग्री सेल्सियस तापमान को लेकर बात नहीं कर रहा है.’ कुछ क्रिकेट विश्लेषक तेज गर्मी के चलते पिच के टूटने और मैच के अंतिम दो दिनों में इसका व्यवहार बदलने की भी बात कह रहे हैं. अगर तेज गर्मी को देखते हुए विकेट टूटता है तो जाहिर है कि स्पिनरों को भी इससे मदद मिल सकती है.