आखिरकार गुरुवार को कांग्रेस नेतृत्व ने मध्य प्रदेश की कमान कमलनाथ के हाथों में सौंप दी. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री पद के दूसरे दावेदार ज्योतिरादित्य सिंधिया को मनाने के लिए सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी को आगे आना पड़ा. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. वहीं, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पर आज फैसला हो सकता है. राजस्थान के लिए अशोक गहलोत और सचिन पायलट अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. वहीं, छत्तीसगढ़ से चार उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल, टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू और चरणदास महंत हैं.

अयोध्या : संतों ने राम की मूर्ति बनाने से पहले मंदिरों को बचाने की गुहार लगाई
अयोध्या के दर्जनभर संतों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से शहर के पुराने मंदिरों को बचाने की गुहार लगाई है. राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक संतों का कहना है कि सरयू तट पर भगवान श्रीराम की मूर्ति सरकार बाद में लगाए पहले वह अयोध्या में सदियों से स्थापित मंदिरों को गिरने से बचाए. बताया जाता है कि अयोध्या नगर निगम ने कई ऐतिहासिक जर्जर मंदिरों को गिराने की आखिरी तारीख 21 दिसंबर तय की है. इसके लिए नगर निगम ने 176 मंदिरों और भवनों के मालिकों को आखिरी नोटिस जारी किया है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माल्या का बचाव किया, ‘विजय माल्या जी’ कहा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भगोड़ा घोषित शराब कारोबारी विजय माल्या का बचाव किया है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि कभी-कभार होने वाली एक गलती के लिए किसी उद्योगपति को धोखेबाज कहना सही नहीं है. नितिन गडकरी ने आगे कहा, ‘अगर विजय माल्या जी या नीरव मोदी ने धोखाधड़ी की है तो उन्हें जेल भेजा जाना चाहिए. लेकिन यदि कोई परेशानी में आता है और उस पर धोखेबाज का ठप्पा लगा देते हैं तो हमारी इकॉनॉकी तरक्की नहीं कर सकती.’ इसके आगे केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘माल्या 40 साल लगातार पेमेंट कर रहे थे. ब्याज भर रहे थे. 40 साल बाद जब वह एविएशन में गए तो अड़चन आई. ऐसे में वह एक कदम से चोर हो गए?’ हालांकि, नितिन गडकरी ने साफ करने की कोशिश की कि उनका विजय माल्या से कुछ भी लेना-देना नहीं है.
ट्राई ने एमएनपी के लिए नए नियम तय किए, समय-सीमा कम की
भारतीय दूरसंचार नियामक (ट्राई) ने ग्राहकों के लिए मोबाइल नंबर को दूसरी कंपनी में बदलवाना यानी एमएनपी अब और आसान कर दिया है. अमर उजाला में छपी खबर की मानें तो गुरुवार को जारी नए नियम के तहत इसके लिए अब दो दिन तय किया गया है. यानी दूरसंचार कंपनियों को ग्राहक के आवेदन पर पोर्टेबिलिटी की सुविधा को 48 घंटे में अंजाम देना होगा. इससे पहले इसके लिए सात दिन तय किया गया था. जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व के राज्यों में यह समय-सीमा 15 दिनों की है. हालांकि, नए नियम के तहत यूनिक पोटिंग कोड (यूपीसी) की वैधता 15 दिनों की जगह केवल चार दिन रखी गई है.
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